Jam Shayari जाम शायरी हिंदी में (2022-23)

Jam Shayari In Hindi | जम शायरी हिंदी में

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Jam Shayari
जम गई धूल मुलाकात के आईनों पर
मुझ को उस की न उसे मेरी जरूरत कोई

जम गया खूँ कफ ए कातिल पे तिरा मीर जि बस
उन ने रो रो दिया कल हाथ को धोते धोते

जम गए राह में हम नक्श ए कदम की सूरत
नक्श ए पा राह दिखाते हैं कि वो आते हैं

कोई भी दिल में जरा जम के खाक उड़ाता तो
हजार गौहर ए नायाब देख सकता था

जम भी वही दारा भी सिकंदर भी वही है
जी कर भी तिरा और जो मर कर भी तिरा है

न सिकंदर है न दारा है न कैसर है न जम
बे महल खाक में हैं कस्र बनाने वाले

ये मय खाना है बज्म ए जम नहीं है
यहाँ कोई किसी से कम नहीं है

रकीब जम के ये बैठा कि हम उठे नाचार
ये पत्थर अब न हटाए हटे है क्या कीजे

आब ए हैराँ पर किसी का अक्स जैसे जम गया
आँख में बस एक लम्हे के लिए ठहरा खयाल

लहू मेरी नसों में भी कभी का जम चुका था
बदन पर बर्फ को ओढ़े नदी भी सो रही थी

तमाम हर्फ मिरे लब पे आ के जम से गए
न जाने मैं कहा क्या और उस ने समझा क्या

ये कैसा खूँ है कि बह रहा है न जम रहा है
ये रंग देखूँ कि दिल जिगर का फिशार देखूँ

किसी की जात में जम हो गया हूँ
मैं अपने आप में गम हो गया हूँ

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