Janab Shayari जनाब शायरी हिंदी में (2022-23)

Janab Shayari In Hindi | जनाब शायरी हिंदी में

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Janab Shayari जनाब शायरी हिंदी में (2022-23) In Hindi

Janab Shayari
क्यूँ सकीना और जैनब इस कदर खामोश हैं
दूर तक सहरा में देखो खामुशी है कर्बला

हर दम यही दुआ है खुदा की जनाब में
आ जाए यार खुद मिरे खत के जवाब में

जनाब के रुख ए रौशन की दीद हो जाती
तो हम सियाह नसीबों की ईद हो जाती

Janab Shayari जनाब शायरी हिंदी में (2022-23) हिंदी में

तहजीब के लिबास उतर जाएँगे जनाब
डॉलर में यूँ नचाएगी इक्कीसवीं सदी

Janab Shayari जनाब शायरी हिंदी में (2022-23) 2 line

उस के ब अद तो जो करना था आप जनाब ने करना था
उस की तो मेराज यही थी आप जनाब तक आया वो

जनाब ए खिज्र राह ए इश्क में लड़ने से क्या हासिल
मैं अपना रास्ता ले लूँ तुम अपना रास्ता ले लो

जनाब ए शैख मय खाने में बैठे हैं बरहना सर
अब उन से कौन पूछे आप ने पगड़ी कहाँ रख दी

जनाब ए शैख समझते हैं खूब रिंदों को
जनाब ए शैख को हम भी मगर समझते हैं

किस को समझाने लगे आप जनाब ए नासेह
मैं तो नादाँ हूँ मगर आप तो नादान नहीं

कदम उठे भी नहीं बज्म ए नाज की जानिब
खयाल अभी से परेशाँ है देखिए क्या हो

छोड़ आते हैं हर जानिब कुछ नक्श ए वफा अपने
हम जीस्त की राहों से जिस वक्त गुजरते हैं

ब जाहिर दश्त की जानिब तो बढ़ता जा रहा है
मगर सब रास्ते भी याद करता जा रहा है

किस मंजिल ए मुराद की जानिब रवाँ हैं हम
ऐ रह रवान ए खाक बसर पूछते चलो

कौन उठाए इश्क के अंजाम की जानिब नजर
कुछ असर बाकी हैं अब तक हैरत ए आगाज के

मैं तमाशा हूँ तमाशाई हैं चारों जानिब
शर्म है शर्म के मारे नहीं रो सकता मैं

जानिब ए कूचा ओ बाजार न देखा जाए
गौर से शहर का किरदार न देखा जाए

जिस की जानिब अदा नजर न उठी
हाल उस का भी मेरे हाल सा था

दिल के तालिब नजर आते हैं हसीं हर जानिब
उस के लाखों हैं खरीदार कि माल अच्छा है

डर है कहीं मैं दश्त की जानिब निकल न जाऊँ
बैठा हूँ अपने पाँव में जंजीर डाल कर

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