Janaza Shayari जनाज़ा शायरी हिंदी में (2022-23)

Janaza Shayari In Hindi | जनाज़ा शायरी हिंदी में

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Janaza Shayari
जनाजा रोक कर मेरा वो इस अंदाज से बोले
गली हम ने कही थी तुम तो दुनिया छोड़े जाते हो

खुद ब खुद अपना जनाजा है रवाँ
हम ये किस के कुश्ता ए रफ्तार हैं

शब को मिरा जनाजा जाएगा यूँ निकल कर
रह जाएँगे सहर को दुश्मन भी हाथ मल कर

मिरी नमाज ए जनाजा पढ़ी है गैरों ने
मरे थे जिन के लिए वो रहे वजू करते

कुर्सी है तुम्हारा ये जनाजा तो नहीं है
कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते

सुब्ह ले जाते हैं हम अपना जनाजा घर से
शाम को फिर उसे काँधों पे उठा लाते हैं

कौन सा दर्द उतर आया है तहरीरों में
सारे अल्फाज जनाजे की तरह लगते हैं

चल साथ कि हसरत दिल ए मरहूम से निकले
आशिक का जनाजा है जरा धूम से निकले

जो रात दिन मिरे मरने की कर रहे थे दुआ
वो रो रहे हैं जनाजे में हिचकियाँ ले कर

हमीं ने हश्र उठा रक्खा है बिछड़ने पर
वो जान ए जाँ तो परेशान भी जियादा नहीं

रब्त ए बाहम के मजे बाहम रहें तो खूब हैं
याद रखना जान ए जाँ गर मैं नहीं तो तू नहीं

अजल से हम नफसी है जो जान ए जाँ से हमें
पयाम दम ब दम आता है ला मकाँ से हमें

सब से प्यारी है जान दुनिया में
जान से बढ़ के जान ए जाँ तू है

रफ्ता रफ्ता वो हमारे दिल के अरमाँ हो गए
पहले जाँ फिर जान ए जाँ फिर जान ए जानाँ हो गए

जान ए जाँ मायूस मत हो हालत ए बाजार से
शायद अगले साल तक दीवाना पन मिलने लगे

मिरे हम सफर मिरी जान ए जाँ कहूँ और क्या
तिरी कुर्बतों में हैं दूरियाँ कहूँ और क्या

कहा मैं ने मरता हूँ तुम पर तो बोले
निकलते न देखा जनाजा किसी का

रूह घबराई हुई फिरती है मेरी लाश पर
क्या जनाजे पर मेरे खत का जवाब आने को है

ये सफर अपना कहीं जानिब ए महशर ही न हो
हम लिए किस का जनाजा हैं ये घर से निकले

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