Jannat Shayari जन्नत शायरी हिंदी में (2022-23)

Jannat Shayari In Hindi | जन्नत शायरी हिंदी में

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Jannat Shayari

कहा मैं ने कि जन्नत पर रजा ए दोस्त फाइक है
रजा ए दोस्त बोली बे खबर मैं ही तो जन्नत हूँ

अपनी जन्नत मुझे दिखला न सका तू वाइज
कूचा ए यार में चल देख ले जन्नत मेरी

मिलेगी शैख को जन्नत हमें दोजख अता होगा
बस इतनी बात है जिस बात पर महशर बपा होगा

ये जन्नत मुबारक रहे जाहिदों को
कि मैं आप का सामना चाहता हूँ

सय्याद तेरा घर मुझे जन्नत सही मगर
जन्नत से भी सिवा मुझे राहत चमन में थी

जन्नत की जिंदगी है जिस की फजा में जीना
मेरा वतन वही है मेरा वतन वही है

कभी जन्नत कभी दोजख कभी का बा कभी दैर
अजब अंदाज से ता मीर हुआ खाना ए दिल

इसी दुनिया में दिखा दें तुम्हें जन्नत की बहार
शैख जी तुम भी जरा कू ए बुताँ तक आओ

खौफ ए दोजख से कभी ख्वाहिश ए जन्नत से कभी
मुझ को इस तर्ज ए इबादत पे हँसी आती है

खुदा से ले लिया जन्नत का व अदे
ये जाहिद तो बड़े ही घाग निकले

जन्नत की ने मतों का मजा वाइ जों को हो
हम तो हैं महव लज्जत ए बोस ओ कनार में

अब नहीं जन्नत मशाम ए कूचा ए यार की शमीम
निकहत ए जुल्फ क्या हुई बाद ए सबा को क्या हुआ

शेख को जन्नत मुबारक हम को दोजख है कुबूल
फिक्र ए उक्बा वो करें हम खिदमत ए दुनिया करें

किस लिए कीजे किसी गुम गश्ता जन्नत की तलाश
जब कि मिट्टी के खिलौनों से बहल जाते हैं लोग

उम्र भर के सज्दों से मिल नहीं सकी जन्नत
खुल्द से निकलने को इक गुनाह काफी है

वाइ जो हम रिंद क्यूँ कर काबिल ए जन्नत नहीं
क्या गुनहगारों को मीरास ए पिदर मिलती नहीं

जबाँ पे आएगा जब जिक्र ए जन्नत
तुम्हारी अंजुमन की बात होगी

जन्नत है उस बगैर जहन्नम से भी जुबूँ
दोजख बहिश्त हैगी अगर यार साथ है

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