Jaroorat Shayari जरूरत शायरी हिंदी में (2022-23)

Jaroorat Shayari In Hindi | जरूरत शायरी हिंदी में

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Jaroorat Shayari जरूरत शायरी हिंदी में (2022-23) In Hindi

Jaroorat Shayari
अगर इतनी मुकद्दम थी जरूरत रौशनी की
तो फिर साए से अपने प्यार करना चाहिए था

खुद चरागों को अंधेरों की जरूरत है बहुत
रौशनी हो तो उन्हें लोग बुझाने लग जाएँ

शायद उसे जरूरत हो अब पर्दे की
रौशनियाँ घर की मद्धम कर जाऊँ मैं

Jaroorat Shayari जरूरत शायरी हिंदी में (2022-23) हिंदी में

दर अस्ल इस जहाँ को जरूरत नहीं मिरी
हर चंद इस जहाँ के लिए ना गुजीर मैं

Jaroorat Shayari जरूरत शायरी हिंदी में (2022-23) 2 line

जो दिन चढ़ा तो हमें नींद की जरूरत थी
सहर की आस में हम लोग रात भर जागे

जौर ए अफ्लाक की शिरकत की जरूरत क्या है
आप काफी हैं जमाने को सताने के लिए

जरूरत ढल गई रिश्ते में वर्ना
यहाँ कोई किसी का अपना कब है

नहीं मंजूर जब मिलना तो वा दे की जरूरत क्या
ये तुम को झूटी मूटी आदत ए इकरार कैसी है

गैर को दर्द सुनाने की जरूरत क्या है
अपने झगड़े में जमाने की जरूरत क्या है

मुफ्लिस के बदन को भी है चादर की जरूरत
अब खुल के मजारों पे ये एलान किया जाए

उसे जियादा जरूरत थी घर बसाने की
वो आ के मेरे दर ओ बाम ले गया मुझ से

बे सबब बात बढ़ाने की जरूरत क्या है
हम खफा कब थे मनाने की जरूरत क्या है

आज पैवंद की जरूरत है
ये सजा है रफू न करने की

मुझ को थकने नहीं देता ये जरूरत का पहाड़
मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते

अब तो खुद अपनी जरूरत भी नहीं है हम को
वो भी दिन थे कि कभी तेरी जरूरत हम थे

यही सूरत वहाँ थी बे जरूरत बुत कदा छोड़ा
खुदा के घर में रक्खा क्या है नाहक इतनी दूर आए

अम्न हर शख्स की जरूरत है
इस लिए अम्न से मोहब्बत है

अब उस की दीद मोहब्बत नहीं जरूरत है
कि उस से मिल के बिछड़ने की आरजू है बहुत

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