Jazbaat Shayari जज़्बात शायरी हिंदी में (2022-23)

Jazbaat Shayari In Hindi | जज्बात शायरी हिंदी में

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Jazbaat Shayari जज़्बात शायरी हिंदी में (2022-23) In Hindi

Jazbaat Shayari
इस कदर भी तो न जज्बात पे काबू रक्खो
थक गए हो तो मिरे काँधे पे बाजू रक्खो

हैं ये जज्बात मिरे दर्द भरे दिल के फिगार
लफ्ज बन बन के जो अशआ र तक आ पहुँचे हैं

इश्क में गैरत ए जज्बात ने रोने न दिया
वर्ना क्या बात थी किस बात ने रोने न दिया

Jazbaat Shayari जज़्बात शायरी हिंदी में (2022-23) हिंदी में

अपने जज्बात से जुदा होना
कितना आसान है खुदा होना

Jazbaat Shayari जज़्बात शायरी हिंदी में (2022-23) 2 line

मेरे जज्बात आँसुओं वाले
सब हिचकियों से लिखता हूँ

जी चाहता है जीना जज्बात के मुताबिक
हालात कर रहे हैं हालात के मुताबिक

दिल का छूना था कि जज्बात हुए पत्थर के
ऐसा लगता है कि हम शहर ए तिलिस्मात में हैं

जज्बात भी हिन्दू होते हैं चाहत भी मुसलमाँ होती है
दुनिया का इशारा था लेकिन समझा न इशारा दिल ही तो है

तजाद ए जज्बात में ये नाजुक मकाम आया तो क्या करोगे
मैं रो रहा हूँ तुम हँस रहे हो मैं मुस्कुराया तो क्या करोगे

दिल को हर लम्हा बचाते रहे जज्बात से हम
इतने मजबूर रहे हैं कभी हालात से हम

दुनिया का इशारा था लेकिन समझा न इशारा, दिल ही तो है

उस के जज्बात से यूँ खेल रहा हूँ सागर
जैसे पानी में कोई आग लगाना चाहे

फिर मुरत्तब किए गए जज्बात
इश्क को इब्तिदा में रक्खा गया

न जज्बात से ये सफर तय हुआ
न दिल से कभी ये जबाँ तक गए

बे खुदी ने कर दिया जज्बात ए दिल से बे नियाज
अब तिरा मिलना न मिलना सब बराबर हो गया

जज्बात में आ कर मरना तो मुश्किल सी कोई मुश्किल ही नहीं
ऐ जान ए जहाँ हम तेरे लिए जीना भी गवारा करते हैं

ऐसा नहीं कि उन से मोहब्बत नहीं रही
जज्बात में वो पहली सी शिद्दत नहीं रही

तिरी रुस्वाई का है डर वर्ना
दिल के जज्बात तो महदूद नहीं

जब निगाहों के इशारात बदल जाते हैं
खुद ब खुद प्यार के जज्बात बदल जाते हैं

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