झूटा शायरी – Jhuta Shayari in Hindi

Jhuta Shayari

झूटा कभी न झूटा होवे
झूटे के आगे सच्चा रोवे !

रंगीन सआदत यार ख़ाँ
झूटे वादों पर थी अपनी ज़िंदगी
अब तो वो भी आसरा जाता रहा !

एक झूटे के वस्फ़ ए दंदाँ में
सच्चे मोती सदा पिरोता हूँ !

जो तुम्हारी तरह तुम से कोई झूटे वादे करता
तुम्हीं मुंसिफ़ी से कह दो तुम्हें एतिबार होता !

झूटे वादे भी नहीं करते आप
कोई जीने का सहारा ही नहीं !

परेशाँ है वो झूटा इश्क़ कर के
वफ़ा करने की नौबत आ गई है !

झूटा समाज रस्म ओ रिवायात सरहदें
अब भी हैं राह ए इश्क़ में दीवार की तरह !

अम्न के सारे सपने झूटे
सपनों की ताबीरें झूटी !

आप ने झूटा वअदा कर के
आज हमारी उम्र बढ़ा दी !

मैं तेरी चाह में झूटा हवस में सच्चा हूँ
बुरा समझ ले मगर दूसरों से अच्छा हूँ !

कैसा झूटा सहारा है ये दुख से आँख चुराने का
कोई किसी का हाल सुना कर अपना आप छुपाता है !

वादा झूटा कर लिया चलिए तसल्ली हो गई
है ज़रा सी बात ख़ुश करना दिल ए नाशाद का !

झूटा जो कहा मैं ने तो शर्मा के वो बोले
अल्लाह बिगाड़े न बनी बात किसी की !

फ़र्ज़ी क़िस्सों झूटी बातों से अक्सर
सच्चाई के क़द को नापा करता हूँ !

झूटी बातें मुझे याद आईं जो उस की शब ए हिज्र
सुब्ह ए काज़िब को मैं पेशानी ए क़ातिल समझा !

झूटी उम्मीद की उँगली को पकड़ना छोड़ो
दर्द से बात करो दर्द से लड़ना छोड़ो !

बदन की आग को कहते हैं लोग झूटी आग
मगर उस आग ने दिल को मिरे गुदाज़ किया !

वो तो बस झूटी तसल्ली को कहा था तुम से
हम तो अपने भी नहीं, ख़ाक तुम्हारे होते !

सौ बार आई होंटों पे झूटी हँसी मगर
इक बार भी न दिल से कभी मुस्कुरा सके !