Jimmedari Shayari | 543+ ज़िम्मेदारी शायरी

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बेवजह देर रात तक मैं जागता रहा,
सुबह उठना कल पर टालता रहा,
खुद में कमियाँ कभी देखी ही नहीं
उम्र भर जिम्मेदारियों से भागता रहा.

 

सबके अंदर इक अजब सी शोर है
बाहर से हर कोई मौन है,
जो तुम्हारी जिंदगी में चल रहा है
उसका जिम्मेदार कौन है?

 

बड़ी नादान मुझे मेरी नादानियाँ लगती है,
ना जाने क्यों बोझ जिम्मेदारियाँ लगती है।

 

प्यार, मोहब्बत और इश्क़ जिम्मेदारी है,
नादान दिल को इतनी कहाँ समझदारी है।

 

जुबान मेरे सिर्फ इसलिए खामोश है,
क्योंकि जिम्मेदारियों के बोझ से दबे है।