जुल्फ शायरी | Julf Shayari

Julf Shayari | जुल्फ शायरी

Julf Shayari In Hindi | जुल्फ शायरी हिंदी में

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Julf Shayari
चश्म पुर नम जुल्फ आशुफ्ता निगाहें बे करार
इस पशीमानी के सदके मैं पशीमाँ हो गया

रुख तह ए जुल्फ है और जुल्फ परेशाँ सर पर
माँग बालों में नहीं है ये नुमायाँ सर पर

शाम ए अवध ने जुल्फ में गूँधे नहीं हैं फूल
तेरे बगैर सुब्ह ए बनारस उदास है

कहते हैं तिरी जुल्फ कूँ देख अहल ए शरीअत
कुर्बान है इस कुफ्र पर ईमान हमारा

मुँह पर नकाब ए जर्द हर इक जुल्फ पर गुलाल
होली की शाम ही तो सहर है बसंत की

घेर लेती है कोई जुल्फ, कोई बू ए बदन
जान कर कोई गिरफ्तार नहीं होता यार

तुम्हारी जुल्फ दिल खुद माँग लेगी
ये चोटी किस लिए पीछे पड़ी है

बिखरी हुई वो जुल्फ इशारों में कह गई
मैं भी शरीक हूँ तिरे हाल ए तबाह में

लाम नस्तालीक का है उस बुत ए खुश खत की जुल्फ
हम तो काफिर हों अगर बंदे न हों इस लाम के

आरिज से उस के जुल्फ में क्यूँ कर है रौशनी
जुल्मात में तो नाम नहीं आफ्ताब का

इधर खयाल मिरे दिल में जुल्फ का गुजरा
उधर वो खाता हुआ दिल में पेच ओ ताब आया

वाँ हिना बंदी थी और जुल्फ को सुलझाना था
याँ परेशानी थी और खून ए जिगर खाना था

जुल्फ के पेच में लटके हुए शाएर का वजूद
थक चुका होगा उसे मिल के उतारो यारो

सरजमीं जुल्फ की जागीर में थी इस दिल की
वर्ना इक दाम का फिर उस में ठिकाना क्या था

किस तरह रब्त न हो जुल्फ से दीवानों को
रब्त होता है परेशाँ से परेशानों को

नसीर उस जुल्फ की ये कज अदाई कोई जाती है
मसल मशहूर है रस्सी जली लेकिन न बल निकला

बिखरी हुई हो जुल्फ भी इस चश्म ए मस्त पर
हल्का सा अब्र भी सर ए मय खाना चाहिए

तिरी जुल्फ की शब का बेदार मैं हूँ
तुझ आँखों के सागर का मय ख्वार मैं हूँ

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