जुनून शायरी – Junun Shayari in Hindi

Junun Shayari

बाद ए बहार में सब आतिश जुनून की है
हर साल आवती है गर्मी में फ़स्ल ए होली !

ख़िरद नहीं है यहाँ बस जुनून का सौदा
हम इस जुनून से आगे मकाँ बनाते हैं !

फिर वही सौदा वही वहशत वही तर्ज़ ए जुनूँ
हैं निशाँ मौजूद सारे इश्क़ की तासीर के !

अजब जुनून है ये इंतिक़ाम का जज़्बा
शिकस्त खा के वो पानी में ज़हर डाल आया !

दिलकशी थी उन्सियत थी या मोहब्बत या जुनून
सब मराहिल तुझ से जो मंसूब थे अच्छे लगे !

थी जुनूँ आमेज़ अपनी गुफ़्तुगू
बात मतलब की भी लेकिन कह गए !

ताब ए यक लहज़ा कहाँ हुस्न ए जुनूँ ख़ेज़ के पेश
साँस लेने से तवज्जोह में ख़लल पड़ता है !

करता है गुल जुनून तमाशा कहें जिसे
गुल दस्ता ए निगाह सुवैदा कहें जिसे !

जुनूँ आसार मौसम का पता कोई नहीं देगा
तुझे ऐ दश्त ए तन्हाई सदा कोई नहीं देगा !

अपने जुनूँ कदे से निकलता ही अब नहीं
साक़ी जो मय फ़रोश सर ए रहगुज़ार था !

ख़िरद का नाम जुनूँ पड़ गया जुनूँ का ख़िरद
जो चाहे आप का हुस्न ए करिश्मा साज़ करे !

जुनूँ शोला सामाँ ख़िरद शबनम अफ़्शाँ
ख़ुदा जाने ये जान जीते कि हारे !

मेरे साथ सु ए जुनून चल मिरे ज़ख़्म खा मिरा रक़्स कर
मेरे पढ़ के मिलेगा क्या पता पढ़ के घर कोई पा सका? !

है मिरा ज़ब्त ए जुनूँ जोश ए जुनूँ से बढ़ कर
नंग है मेरे लिए चाक ए गरेबाँ होना !

इश्क़ को दीजिए जुनूँ में फ़रोग़
दर्द से दर्द की दवा कीजिए !

इश्क़ में ख़ैर था जुनूँ लाज़िम
अब कोई दूसरा हुनर भी करूँ !

ऐ ज़िंदगी जुनूँ न सही बे ख़ुदी सही
तू कुछ भी अपनी अक़्ल से पागल उठा तो ला !

हर चंद ओ शौक़ की बुनियाद है जुनूँ
चलता नहीं है काम ख़िरद के बग़ैर भी !

जुनूँ में और ख़िरद में दर हक़ीक़त फ़र्क़ इतना है
वो ज़ेर ए दर है साक़ी और ये ज़ेर ए दाम है साक़ी