Kaash Shayari काश शायरी हिंदी में (2022-23)

Kaash Shayari In Hindi | काश शायरी हिंदी में

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Kaash Shayari
खुदा ऐ काश नाजिश जीते जी वो वक्त भी लाए
कि जब हिन्दोस्तान कहलाएगा हिन्दोस्तान ए आजादी

ये मिस्रा काश नक्श ए हर दर ओ दीवार हो जाए
जिसे जीना हो मरने के लिए तय्यार हो जाए

काश लौटें मिरे पापा भी खिलौने ले कर
काश फिर से मिरे हाथों में खजाना आए

काश मैं पर्दे का शिकवा ही न करता उन से
बे हिजाबी ने किया और भी बेताब मुझे

काश देखो कभी टूटे हुए आईनों को
दिल शिकस्ता हो तो फिर अपना पराया क्या है

काश उस के रू ब रू न करें मुझ को हश्र में
कितने मिरे सवाल हैं जिन का नहीं जवाब

काश तुम समझ सकतीं जिंदगी में शाएर की ऐसे दिन भी आते हैं
जब उसी के पर्वर्दा चाँद उस पे हँसते हैं फूल मुस्कुराते हैं

काश हम नाकाम भी काम आएँ तेरे इश्क में
मुतलकन नाकारा हैं दुनिया ओ दीं के काम से

ये सदा काश उसी ने दी हो
इस तरह वो ही बुलाता है मुझे

काश मैं तेरी मुलाकात को खुद ही आता
तूर पर भेज के मूसा को पशेमाँ हूँ मैं

काश दौलत ए गम ही अपने पास बच रहती
वो भी उन को दे बैठे ऐसी मात खाई है

तुम्हें ऐ काश कोई राज ये समझा गया होता
अगर सुनते तो कहने का सलीका आ गया होता

काश सोता ही रहूँ मैं कि नहीं चाहता दिल
हर सहर उठ के रुख ए गब्र ओ मुसलमाँ देखूँ

ऐ काश कोई शम्अ के ले जा के मुझे पास
ये बात कहे उस से कि परवाना है ये भी

कोई तुम सा भी काश तुम को मिले
मुद्दआ हम को इंतिकाम से है

ऐ काश खुद सुकूत भी मुझ से हो हम कलाम
मैं खामुशी जदा हूँ सदा चाहिए मुझे

रिश्ता बहाल काश फिर उस की गली से हो
जी चाहता है इश्क दोबारा उसी से हो

काश इतना ही समझ लेते ये अहल ए कारवाँ
फासले बढ़ जाते हैं सहमी हुई रफ्तार से

कोई हसीन भी ऐ काश चुलबुला मिलता
मिला था दिल जो हमें इज्तिराब के काबिल

वकार ऐ काश मेरी उम्र में शामिल न की जाए
वो मुद्दत हाँ वही मुद्दत जो गुजरी उन की फुर्कत में

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