Kalam Shayari कलम शायरी हिंदी में (2022-23)

Kalam Shayari In Hindi | कलम शायरी हिंदी में

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Kalam Shayari
कलम उठाऊँ कि बच्चों की जिंदगी देखूँ
पड़ा हुआ है दोराहे पे अब हुनर मेरा

अल्फाज मदह ख्वाँ थे कलम थे बिके हुए
कैसे तराश लेते कोई शाह कार हम

बच्चों की फीस उन की किताबें कलम दवात
मेरी गरीब आँखों में स्कूल चुभ गया

कलम में जोर जितना है जुदाई की बदौलत है
मिलन के ब अद लिखने वाले लिखना छोड़ देते हैं

मुसहफी रशहा ए कलम से मिरे
मीर की कुल्लियात भीगी है

सरहद ए जाँ तलक कलम रौ दिल
इस से आगे निजाम दर्द का है

कलम सिफत में पस अज मरातिब बदन सना में तिरी खपाया
बदन जबाँ में जबाँ सुखन में सुखन सना में तिरी खपाया

अहल ए जर ने देख कर कम जरफी ए अहल ए कलम
हिर्स ए जर के हर तराजू में सुखन वर रख दिए

बंदे के कलम हाथ में होता तो गजब था
सद शुक्र कि है कातिब ए तकदीर कोई और

एजाज ए जाँ दही है हमारे कलाम को
जिंदा किया है हम ने मसीहा के नाम को

हम परवरिश ए लौह ओ कलम करते रहेंगे
जो दिल पे गुजरती है रकम करते रहेंगे

मुसव्विरों ने कलम रख दिए हैं हाथों से
बनावें आइने में अपना नकश ए सानी आप

मैं ने जाना था कलम बंद करेगा दो हर्फ
शौक के लिखने का सज्जाद ने खोला दफ्तर

मुझ में थे जितने ऐब वो मेरे कलम ने लिख दिए
मुझ में था जितना हुस्न वो मेरे हुनर में गुम हुआ

बरसों से कान पर है कलम इस उमीद पर
लिखवाए मुझ से खत मिरे खत के जवाब में

मौजा ए अश्क से भीगी न कभी नोक ए कलम
वो अना थी कि कभी दर्द न जी का लिक्खा

अब आ के कलम के पहलू में सो जाती हैं बे कैफी से
मिसरों की शोख हसीनाएँ सौ बार जो रूठती मनती थीं

जो अजल में कलम चली सो चली
बद हुआ या निको हुआ सो हुआ

दहन है तंग शकर और शकर है तिरा है कलाम
लबाँ हैं पिस्ता जनख सेब ओ चश्म हैं बादाम

साबिर तेरा कलाम सुनें क्यूँ न अहल ए फन
बंदिश अजब है और अजब बोल चाल है

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