Khamoshi Shayari | ख़ामोशी शायरी 736+

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Khamoshi Shayari

जब खामोश आँखो से बात होती है,
ऐसे ही मोहब्बत की शुरुआत होती है,
तुम्हारे ही ख़यालो में खोए रहते हैं,पता
नही कब दिन और कब रात होती है
वादियों से सूरज निकल आया है,
फिजाओं में नया रंग छाया है,खामोश
क्यों हो अब तो मुस्कुराओ, आपकी
मुस्कान देखने नया सवेरा आया है
खामोशी की भी अपनी एक अलग
ही अहमियत होती है तितलियाँ अपनी
खूबसूरती का बखान नहीं किया करतीं
अंधेरे में भी सितारे उग आते,
रात चाँदनी रहती है,कहीं
जलन है दिल में मेरे,ये
खामोशी कुछ तो कहती है
रात गम सुम है मगर खामोश नहीं,
कैसे कह दूँ आज फिर होश नहीं,
ऐसे डूबा हूँ तेरी आँखों की गहराई में
हाथ में जाम है मगर पीने का होश नहीं
ख़ामोश फ़िजा थी कोई साया न था,
इस शहर में मुझसा कोई आया न था,
किसी जुल्म ने छीन ली हमसे हमारी मोहब्बत
हमने तो किसी का दिल दुखाया न था
खामोशियाँ वही रही ता-उम्र दरमियाँ,
बस वक़्त के सितम और हसीन होते गए