Khas Shayari खास शायरी हिंदी में (2022-23)

Khas Shayari In Hindi | खास शायरी हिंदी में

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Khas Shayari
कुव्वत ए तामीर थी कैसी खस ओ खाशाक में
आँधियाँ चलती रहीं और आशियाँ बनता गया

दौलत ए गम भी खस ओ खाक ए जमाना में गई
तुम गए हो तो मह ओ साल कहाँ ठहरे हैं

फूँक दो याँ गर खस ओ खाशाक हैं
दूर क्यूँ फेंको हमें गुलजार से

बस एक लम्स कि जल जाएँ सब खस ओ खाशाक
इसे विसाल भी कहते हैं खुश बयानी में

खस नमत साथ मौज के लग ले
बहते बहते कहीं तो जाइएगा

जिंदगी देख तिरी खास रिआयत होगी
इक मोहब्बत है मिरे पास अगर करने दे

जो खास जल्वे थे उश्शाक की नजर के लिए
वो आम कर दिए तुम ने जहान भर के लिए

गजल फजा भी ढूँडती है अपने खास रंग की
हमारा मसअला फकत कलम दवात ही नहीं

दी है नय्यर मुझ को साकी ने ये कैसी खास मय
सब की नजरें उठ रही हैं मेरे सागर की तरफ

अदा ए खास से गालिब हुआ है नुक्ता सरा
सला ए आम है यारान ए नुक्ता दाँ के लिए

साकी वो खास तौर की ता लीम दे मुझे
उस मय कदे में जाऊँ तो पीर ए मुगाँ रहूँ

मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल मख्सूस होते हैं
ये वो नग्मा है जो हर साज पर गाया नहीं जाता

उस से कुछ खास तअल्लुक भी नहीं है अपना
मैं परेशान हुआ जिस की परेशानी पर

पैगाम ए लुत्फ ए खास सुनाना बसंत का
दरिया ए फैज ए आम बहाना बसंत का

मर गया खास तौर पर मैं भी
जिस तरह आम लोग मरते हैं

ये तर्ज ए खास है कोई कहाँ से लाएगा
जो हम कहेंगे किसी से कहा न जाएगा

यूँ मआनी से बहुत खास है रिश्ता अपना
जिंदगी कट गई लफ्जों को खबर करने में

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