Khawab Shayari ख्वाब शायरी हिंदी में (2022-23)

Khawab Shayari In Hindi | ख़्वाब शायरी हिंदी में

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Khawab Shayari
ख्वाब शर्मिंदा ए विसाल हुआ
हिज्र में नींद आ गई थी मुझे

ख्वाब का दरवाजा कुइ मसदूद कर देता है रोज
पड़ते हैं रातों को याँ ऐसे ही पत्थर ख्वाब में

जिंदगी ख्वाब देखती है मगर
जिंदगी जिंदगी है ख्वाब नहीं

इक यकीं परवर गुमाँ और इक हयात आमेज ख्वाब
जैसे कोई आएगा और उलझनें ले जाएगा

यही है जिंदगी कुछ ख्वाब चंद उम्मीदें
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो

जिंदगी ख्वाब है और ख्वाब भी ऐसा कि मियाँ
सोचते रहिए कि इस ख्वाब की ताबीर है क्या

ख्वाब, उम्मीद, तमन्नाएँ, तअल्लुक, रिश्ते
जान ले लेते हैं आखिर ये सहारे सारे

खुशनुमा दीवार ओ दर के ख्वाब ही देखा किए
जिस्म सहरा जेहन वीराँ आँख गीली हो गई

देने वाले तू मुझे नींद न दे ख्वाब तो दे
मुझ को महताब से आगे भी कहीं जाना है

दिलों के दर्द जगा ख्वाहिशों के ख्वाब सजा
बला कशान ए नजर के लिए सराब सजा

ख्वाब ए जियाँ हैं उम्र का ख्वाब हैं हासिल ए हयात
इस का भी था यकीं मुझे वो भी मिरे गुमाँ में था

खफा देखा है उस को ख्वाब में दिल सख्त मुज्तर है
खिला दे देखिए क्या क्या गुल ए ताबीर ए ख्वाब अपना

रफाकतों के नए ख्वाब खुशनुमा हैं मगर
गुजर चुका है तिरे ए तिबार का मौसम

ख्वाब का क्या है रात के नक्श ओ निगार बनाओ
रात के नक्श ओ निगार बनाओ ख्वाब का क्या है

दुनिया है ख्वाब हासिल ए दुनिया खयाल है
इंसान ख्वाब देख रहा है खयाल में

वो ख्वाब ही सही पेश ए नजर तो अब भी है
बिछड़ने वाला शरीक ए सफर तो अब भी है

आँखों से ख्वाब दिल से तमन्ना तमाम शुद
तुम क्या गए कि शौक ए नजारा तमाम शुद

चंद यादों के दिए थोड़ी तमन्ना कुछ ख्वाब
जिंदगी तुझ से जियादा नहीं माँगा हम ने

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