Khushboo Shayari खुशबू शायरी हिंदी में (2022-23)

Khushboo Shayari In Hindi | खुशबू शायरी हिंदी में

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Khushboo Shayari खुशबू शायरी हिंदी में (2022-23) In Hindi

Khushboo Shayari

ख्वाब गह में सियाह खुशबू थी
इत्तिफाकन चराग भी गुल था

गुलशन ए दहर से खुशबू की तरह गुजरा मैं
सब को महकाया मगर अपनी नुमाइश नहीं की

Khushboo Shayari खुशबू शायरी हिंदी में (2022-23) हिंदी में

दस्तक में कोई दर्द की खुश्बू जरूर थी
दरवाजा खोलने के लिए घर का घर उठा

Khushboo Shayari खुशबू शायरी हिंदी में (2022-23) 2 line

खुशबू की तरह शब को मचलता था गुल बदन
बिस्तर से चुन रहा हूँ मैं टूटे हुए बटन

दिखाई देने लगी थी खुशबू
मैं फूल आँखों पे मल रहा था

खुशबू बिखेरना मिरी फितरत है दोस्तो
खुशबू बिखेरता हूँ मैं गुल दान छोड़ कर

मुझे तो इश्क है फूलों में सिर्फ खुशबू से
बुला रही है किसी लाला की महक मुझ को

ख्वाबों की तरह आना खुशबू की तरह जाना
मुमकिन ही नहीं लगता ऐ दोस्त तुझे पाना

खुशबू गिरफ्त ए अक्स में लाया और उस के बाद
मैं देखता रहा तिरी तस्वीर थक गई

कच्ची कब्रों पर सजी खुशबू की बिखरी लाश पर
खामुशी ने इक नए अंदाज में तकरीर की

रस घोलते शीरीं लफ्जों की तासीर से खुशबू आती है
अंदाज ए बयाँ से लहजे से तकरीर से खुशबू आती है

जो एक लफ्ज की खुशबू न रख सका महफूज
मैं उस के हाथ में पूरी किताब क्या देता

याद की खुशबू दिल के नगर में फैलेगी
गम के साए लगते हैं अब शीतल से

सच्चाई की खुशबू की रमक तक न थी उन में
वो लोग जो बाजार ए हुनर खोले हुए थे

पलकें हैं कि सरगोशी में खुश्बू का सफर है
आँखों की खमोशी है कि आवाज का चेहरा

आपसी रिश्तों की खुशबू को कोई नाम न दो
इस तकद्दुस को न कागज पर उतारा जाए

वो कि खुशबू की तरह फैला था मेरे चार सू
मैं उसे महसूस कर सकता था छू सकता न था

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