Khwahish Shayari ख्वाहिश शायरी हिंदी में (2022-23)

Khwahish Shayari In Hindi | ख़्वाहिश शायरी हिंदी में

* Shayari In Hindi (* हिंदी में) सम्बंधित हर शायरी पोस्ट के अन्दर है.Khwahish Shayari In Hindi | ख़्वाहिश शायरी हिंदी में * Shayari In Hindi (* हिंदी में) सम्बंधित हर शायरी पोस्ट के अन्दर है.

Khwahish Shayari
विसाल ए यार की ख्वाहिश में अक्सर
चराग ए शाम से पहले जला हूँ

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

तू परिंदों की तरह उड़ने की ख्वाहिश छोड़ दे
बे जमीं लोगों के सर पर आसमाँ रहता नहीं

दिल ए वहशी को ख्वाहिश है तुम्हारे दर पे आने की
दिवाना है व लेकिन बात करता है ठिकाने की

दिल में है मुलाकात की ख्वाहिश की दबी आग
मेहंदी लगे हाथों को छुपा कर कहाँ रक्खूँ

ख्वाहिश है कि खुद को भी कभी दूर से देखूँ
मंजर का नजारा करूँ मंजर से निकल कर

देख रह जाए न तू ख्वाहिश के गुम्बद में असीर
घर बनाता है तो सब से पहले दरवाजा लगा

रूह में रेंगती रहती है गुनह की ख्वाहिश
इस अमरबेल को इक दिन कोई दीवार मिले

दिल से रुख्सत हुई कोई ख्वाहिश
गिर्या कुछ बे सबब नहीं आता

जो तिरे खित्ता ए बे आब की ख्वाहिश न बना
कुलबुलाता है वो दरिया किसी कोहसार में गुम

खुद को हम जोड़ने की ख्वाहिश में
कितने खानों में टूट जाते हैं

अपनी ख्वाहिश में जो बस गए हैं वो दीवार ओ दर छोड़ दें
धूप आँखों में चुभने लगी है तो क्या हम सफर छोड़ दें

उस ने भी कई रोज से ख्वाहिश नहीं ओढ़ी
मैं ने भी कई दिन से इरादा नहीं पहना

क्या वो ख्वाहिश कि जिसे दिल भी समझता हो
आरजू वो है जो सीने में रहे नाज के साथ

किसे पाने की ख्वाहिश है कि साजिद
मैं रफ्ता रफ्ता खुद को खो रहा हूँ

दिनों महीनों आँखें रोईं नई रुतों की ख्वाहिश में
रुत बदली तो सूखे पत्ते दहलीजों में दर आए

तबाह कर गई पक्के मकान की ख्वाहिश
मैं अपने गाँव के कच्चे मकान से भी गया

एक ख्वाहिश है जो शायद उम्र भर पूरी न हो
एक सपने से हमेशा प्यार करना है मुझे

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