लिखे शायरी | Likhe Shayari

Likhe Shayari

लिखते रुक़आ लिखे गए दफ़्तर
शौक़ ने बात क्या बढ़ाई है !

इश्क़ ने मंसब लिखे जिस दिन मिरी तक़दीर में
दाग़ की नक़दी मिली सहरा मिला जागीर में !

पकड़े जाते हैं फ़रिश्तों के लिखे पर ना हक़
आदमी कोई हमारा दम ए तहरीर भी था !

दो ख़त ब नाम ए ज़ौजा ओ जानाँ लिखे मगर
दोनों ख़तों का उस से लिफ़ाफ़ा बदल गया !

गर हमारे क़त्ल के मज़मूँ का वो नामा लिखे
बैज़ा ए फ़ौलाद से निकलें कबूतर सैकड़ों !

अश्क अगर सब ने लिखे मैं ने सितारे लिक्खे
आजिज़ी सब ने लिखी मैं ने इबादत लिक्खा !

हम ने कुछ गीत लिखे हैं जो सुनाना हैं तुम्हें
तुम कभी बज़्म सजाना तो ख़बर कर देना !

रिज़्क़ जैसा है मुक़द्दर में लिखा होता है
फ़न किसी शख़्स की जागीर नहीं हो सकता !

क़ामत ही लिखा हम ने सदा जा ए क़यामत
क़ामत ने भुलाया तिरे इम्ला ए क़यामत !

मैं वो मअनी ए ग़म ए इश्क़ हूँ जिसे हर्फ़ हर्फ़ लिखा गया
कभी आँसुओं की बयाज़ में कभी दिल से ले के किताब तक !

ज़िंदा हूँ कि मरना मिरी क़िस्मत में लिखा है
हर रोज़ गुनाहों की सज़ा काट रहा हूँ !

लहू से मैं ने लिखा था जो कुछ दीवार ए ज़िंदाँ पर
वो बिजली बन के चमका दामन ए सुब्ह ए गुलिस्ताँ पर !

मुसहफ़ी इस से भी रंगीं ग़ज़ल इक और लिखी
रख दिया ताज़ा गुलिस्ताँ को गुलिस्ताँ के तले !

लिखा हुआ इन्ही ज़र्रात के सहीफ़ों में
मिरा फ़साना है लेकिन मिरी ज़बाँ में नहीं !

बूट डासन ने बनाया मैं ने इक मज़मूँ लिखा
मुल्क में मज़मूँ न फैला और जूता चल गया !

जो अश्क सुर्ख़ है नामा निगार है दिल का
सुकूत ए शब में लिखे जा रहे हैं अफ़्साने !

चलना लिखा है अपने मुक़द्दर में उम्र भर
मंज़िल हमारी दर्द की राहों में गुम हुई !

राज़ की बातें लिखी और ख़त खुला रहने दिया
जाने क्यूँ रुस्वाइयों का सिलसिला रहने दिया !

वस्फ़ अँखियों का लिखा हम ने गुल ए बादाम पर
कर के नर्गिस को क़लम और चश्म ए आहू की दवात !

काग़ज़ में दब के मर गए कीड़े किताब के
दीवाना बे पढ़े लिखे मशहूर हो गया !