Majboor Shayari मजबूर शायरी हिंदी में (2022-23)

Majboor Shayari In Hindi | मजबूर शायरी हिंदी में

* Shayari In Hindi (* हिंदी में) सम्बंधित हर शायरी पोस्ट के अन्दर है.Majboor Shayari In Hindi | मजबूर शायरी हिंदी में  * Shayari In Hindi (* हिंदी में) सम्बंधित हर शायरी पोस्ट के अन्दर है.

Majboor Shayari
खुदा हम तो शब ए फिराक से मजबूर हो गए
इस शब को तू ही सुब्ह कर अब ऐ खदा ए सुब्ह

गम ए जमाना ने मजबूर कर दिया वर्ना
ये आरजू थी कि बस तेरी आरजू करते

हो के मजबूर ये बच्चों को सबक देना है
अब कलम छोड़ के तलवार उठा ली जाए

दोनों का मिलना मुश्किल है दोनों हैं मजबूर बहुत
उस के पाँव में मेहंदी लगी है मेरे पाँव में छाले हैं

दे के दिल हम जो हो गए मजबूर
इस में क्या इख्तियार है अपना

मेरे उस के बीच का रिश्ता इक मजबूर जरूरत है
मैं सूखे जज्बों का ईंधन वो माचिस की तीली सी

इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ
वगरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैं ने

मुख्तार मैं अगर हूँ तो मजबूर कौन है
मजबूर आप हैं तो किसे इख्तियार है

गुनाहों पर वही इंसान को मजबूर करती है
जो इक बे नाम सी फानी सी लज्जत है गुनाहों में

फरहत सुनाऊँ किस को कहानी मैं गाँव की
घर घर में जिंदा लाशें थीं मजबूर माओं की

मंजिल पे भी पहुँच के मयस्सर नहीं सकूँ
मजबूर इस कदर हैं शुऊर ए सफर से हम

लपका है बगूला सा अभी उन की तरफ को
शायद किसी मजबूर की आहों का धुआँ था

मुझे तौबा का पूरा अज्र मिलता है उसी साअत
कोई जोहरा जबीं पीने पे जब मजबूर करता है

काम क्या निकले किसी तदबीर से
आदमी मजबूर है तकदीर से

ता मर्ग मुझ से तर्क न होगी कभी नमाज
पर नश्शा ए शराब ने मजबूर कर दिया

जुनूँ को ढाल बनाया तो बच गए वर्ना
ये जिंदगी हमें मजबूर कर भी सकती थी