Majbooriyan Shayari मजबूरियां शायरी हिंदी में (2022-23)

Majbooriyan Shayari In Hindi | मजबूरियां शायरी हिंदी में

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Majbooriyan Shayari
ये मेरे इश्क की मजबूरियाँ मआज अल्लाह
तुम्हारा राज तुम्हीं से छुपा रहा हूँ मैं

तेरी मजबूरियाँ दुरुस्त मगर
तू ने वादा किया था याद तो कर

हाए री मजबूरियाँ तर्क ए मोहब्बत के लिए
मुझ को समझाते हैं वो और उन को समझाता हूँ मैं

न जाने कौन सी मजबूरियाँ हैं जिन के लिए
खुद अपनी जात से इंकार करना पड़ता है

मालूम थीं मुझे तिरी मजबूरियाँ मगर
तेरे बगैर नींद न आई तमाम रात

कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी
यूँ कोई बेवफा नहीं होता

मिरी मजबूरियाँ क्या पूछते हो
कि जीने के लिए मजबूर हूँ मैं

हाए रे मजबूरियाँ महरूमियाँ नाकामियाँ
इश्क आखिर इश्क है तुम क्या करो हम क्या करें

बच्चा मजबूरियों को क्या जाने
इक खिलौना खरीदना था मुझे

मैं बंद कमरे की मजबूरियों में लेटा रहा
पुकारती फिरी बाजार में हवा मुझ को

मजबूरियों को अपनी कहें क्या किसी से हम
लाए गए हैं, आए नहीं हैं खुशी से हम

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