मरने शायरी – Marne Shayari in Hindi

Marne Shayari

अभी मरने की जल्दी है इबादी
अगर ज़िंदा रहे तो फिर मिलेंगे !

बाद मरने के भी छोड़ी न रिफ़ाक़त मेरी
मेरी तुर्बत से लगी बैठी है हसरत मेरी !

मरने की आरज़ू मुझे मुद्दत से थी ज़रूर
लेकिन ये काम हो नहीं सकता जिए बग़ैर !

वो आशिक़ हैं कि मरने पर हमारे
करेंगे याद हम को उम्र भर आप !

वो ताज़ा दास्ताँ हूँ मरने के बाद उन को
आएगा याद मेरा अफ़्साना ज़िंदगी का !

सब ने माना मरने वाला दहशत गर्द और क़ातिल था
माँ ने फिर भी क़ब्र पे उस की राज दुलारा लिक्खा था !

उस बेवफ़ा पे मरने को आमादा दिल नहीं
लेकिन वफ़ा की ज़िद है कि मर जाना चाहिए !

वही जीने की आज़ादी वही मरने की जल्दी है
दिवाली देख ली हम ने दसहरे कर लिए हम ने !

बाद मरने के मिरी क़ब्र पे आया ग़ाफ़िल
याद आई मिरे ईसा को दवा मेरे बाद !

जीने भी नहीं देते मरने भी नहीं देते
क्या तुम ने मोहब्बत की हर रस्म उठा डाली !

मरने वाले फ़ना भी पर्दा है
उठ सके गर तो ये हिजाब उठा !

मरते हैं आरज़ू में मरने की
मौत आती है पर नहीं आती !

मरने के बअद कोई पशेमाँ हुआ तो क्या
मातम कदा जो गोर ए ग़रीबाँ हुआ तो क्या !

सदियाँ जिन में ज़िंदा हों वो सच भी मरने लगते हैं
धूप आँखों तक आ जाए तो ख़्वाब बिखरने लगते हैं !

ऐ मिरे मूनिस ओ ग़म ख़्वार मुझे मरने दे
बात अब हुक्म की तामील तक आ पहुँची है !

इस वहम में वो दाग़ को मरने नहीं देते
माशूक़ न मिल जाए कहीं ज़ेर ए ज़मीं और !

मरने वाला ख़ुद रूठा था
या नाराज़ हयात हुई थी !

हम मय कशों को डर नहीं मरने का मोहतसिब
फ़िरदौस में भी सुनते हैं नहर ए शराब है !

उम्र भर देखा किए मरने की राह
मर गए पर देखिए दिखलाएँ क्या !

एक को एक नहीं रश्क से मरने देता
ये नया कूचा ए क़ातिल में तमाशा देखा !