Masroof Shayari मसरूफ शायरी हिंदी में (2022-23)

Masroof Shayari In Hindi | मसरूफ शायरी हिंदी में

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Masroof Shayari
रोज ओ शब कोई तुम्हारे ध्यान में मसरूफ है
कुछ तुम्हें भी ध्यान है प्यारे किसी के ध्यान का

हर आदमी वहाँ मसरूफ कहकहों में था
ये आँसुओं की कहानी किसे सुनाते हम

देखा है मुझे अपनी खुशामद में जो मसरूफ
इस बुत को ये धोका है कि इस्लाम यही है

ऐसा कुछ गर्दिश ए दौराँ ने रखा है मसरूफ
माजरे हो न सके हम से कलम बंद अपने

मसरूफ है आराइश ए गुलशन में कुछ ऐसी
टिकते ही नहीं पाँव कहीं बाद ए सबा के

इन दिनों मैं भी हूँ कुछ कार ए जहाँ में मसरूफ
बात तुझ में भी नहीं रह गई पहले वाली

मसरूफ हम भी अंजुमन आराइयों में थे
घर जल रहा था लोग तमाशाइयों में थे

ओ मेरे मसरूफ खुदा
अपनी दुनिया देख जरा

मसरूफ हैं कुछ इतने कि हम कार ए मोहब्बत
आगाज तो कर लेते हैं जारी नहीं रखते

इतना मसरूफ कर लिया खुद को
गम भी आ कर खुशी से लौट गए

यहाँ तक कर लिया मसरूफ खुद को
अकेली हो गई तन्हाई मेरी

एक बार उस ने बुलाया था तो मसरूफ था मैं
जीते जी फिर कभी बारी ही नहीं आई मिरी

उस से कह दो कि मुझे उस से नहीं मिलना है
वो है मसरूफ तो बे कार नहीं हूँ मैं भी

याद भी आता नहीं कुछ भूलता भी कुछ नहीं
या बहुत मसरूफ हूँ मैं या बहुत फुर्सत में हूँ

फुर्सत में रहा करते हैं फुर्सत से ज्यादा
मसरूफ हैं हम लोग जरूरत से ज्यादा

लफ्ज रंगों में नहाए हुए घर में आए
तेरी आवाज की तस्वीर में मसरूफ था मैं

उस को भी याद करने की फुर्सत न थी मुझे
मसरूफ था मैं कुछ भी न करने के बावजूद

ये सोचना गलत है कि तुम पर नजर नहीं
मसरूफ हम बहुत हैं मगर बे खबर नहीं

ख्वाब देखा था मोहब्बत का मोहब्बत की कसम
फिर इसी ख्वाब की ताबीर में मसरूफ था मैं

गुंजाइश ए अफ्सोस निकल आती है हर रोज
मसरूफ नहीं रहता हूँ फुर्सत के बराबर

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