Mehboob Shayari महबूब शायरी हिंदी में (2022-23)

Mehboob Shayari In Hindi | महबूब शायरी हिंदी में

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Mehboob Shayari महबूब शायरी हिंदी में (2022-23) In Hindi

Mehboob Shayari

अब याद कभी आए तो आईने से पूछो
महबूब खिजाँ शाम को घर क्यूँ नहीं जाते

वही माबूद है नाजिम जो है महबूब अपना
काम कुछ हम को न मस्जिद से न बुत खाने से

Mehboob Shayari महबूब शायरी हिंदी में (2022-23) हिंदी में

हुदूद ए कूचा ए महबूब हैं वहीं से शुरूअ
जहाँ से पड़ने लगीं पाँव डगमगाते हुए

Mehboob Shayari महबूब शायरी हिंदी में (2022-23) 2 line

दामन ए महबूब तक पहुँचा न जब दस्त ए जुनूँ
बढ़ गया नाचार अपने ही गरेबाँ की तरफ

मरता है जो महबूब की ठोकर पे नजीर आह
फिर उस को कभी और कोई लत नहीं लगती

क्या सितम है कि वो जालिम भी है महबूब भी है
याद करते न बने और भुलाए न बने

गुलाबों के नशेमन से मिरे महबूब के सर तक
सफर लम्बा था खुशबू का मगर आ ही गई घर तक

कोई समझाईयो यारो मिरा महबूब जाता है
मिरा मक्सूद जाता है मिरा मतलूब जाता है

कितने महबूब घरों से गए किस को मालूम
वापस आए हैं जो अपनों में खबर की सूरत

हमारे दिल की हालत गेसु ए महबूब जाने है
परेशाँ की परेशानी परेशाँ खूब जाने है

तू ही वो फूल है जो है महबूब
पत्ते पत्ते का डाली डाली का

आगे क्या तुम सा जहाँ में कोई महबूब न था
क्या तुम्हीं खूब बने और कोई खूब न था

मुझ को मालूम है महबूब परस्ती का अजाब
देर से चाँद निकलना भी गलत लगता है

जरा सँभलूँ भी तो वो आँखों से पिला देता है
मेरा महबूब मुझे होश में रहने नहीं देता

बदन पर बार है फूलों का साया
मिरा महबूब ऐसा नाजनीं है

अब तक तिरे होंटों पे तबस्सुम का गुमाँ है
हम को तो है महबूब यही आध खिला फूल

गुल हो महताब हो आईना हो खुर्शीद हो मीर
अपना महबूब वही है जो अदा रखता हो

सब दिखाते हैं तिरा अक्स मिरी आँखों में
हम जमाने को इसी तौर से महबूब हुए

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