Muskaan Shayari मुस्कान शायरी हिंदी में (2022-23)

Muskaan Shayari In Hindi | मुस्कान शायरी हिंदी में

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Muskaan Shayari
जीने मरने का एक ही सामान
उस की मुस्कान हो गई होगी

ब अद मुद्दत गर्दिश ए तस्बीह से मिस्कीं हमें
दाना ए तस्बीह में जुन्नार आता है नजर

हम वहशियों का मस्कन क्या पूछता है जालिम
सहरा है तो सहरा है जिंदाँ है तो जिंदाँ है

हर एक सम्त यहाँ वहशतों का मस्कन है
जुनूँ के वास्ते सहरा ओ आशियाना क्या

अब तो सब का तिरे कूचे ही में मस्कन ठहरा
यही आबाद है दुनिया में जमीं थोड़ी सी

तरफ ए काबा न जा हज के लिए नादाँ है
गौर कर देख कि है खाना ए दिल मस्कन ए दोस्त

नजर में काबा क्या ठहरे कि याँ दैर
रहा है मुद्दतों मस्कन हमारा

मुझ को जन्नत से उठा कर ये कहाँ फेंक दिया
अपने मस्कन से बहुत दूर रहूँगा कैसे

खयाल ए नाफ में जुल्फों ने मुश्कीं बाँध दीं मेरी
शनावर किस तरह गिर्दाब से बे दस्त ओ पा निकले

शम्अ माशूकों को सिखलाती है तर्ज ए आशिकी
जल के परवाने से पहले बुझ के परवाने के बाद

माशूकों से उम्मीद ए वफा रखते हो नासिख
नादाँ कोई दुनिया में नहीं तुम से जियादा

खफा भी हो के जो देखे तो सर निसार करूँ
अगर न देखे तो फिर भी है इक सलाम से काम

हजारों रंज ए दिल दे दे के माशूकों को झेले हैं
ये पापड़ किस ने बेले हैं ये पापड़ मैं ने बेले में

जुल्फ ए मुश्कीं थी मेहरबाँ किस की
बू बसी है दिमाग में अब तक

दैर से काबा गए काबा से माबदगाह में
खाक भी पाया नहीं दैर ओ हरम की राह में

घर वाले मुझे घर पर देख के खुश हैं और वो क्या जानें
मैं ने अपना घर अपने मस्कन से अलग कर रक्खा है

बुत नजर आएँगे माशूकों की कसरत होगी
आज बुत खाना में अल्लाह की कुदरत होगी

छोड़ दें दैर ओ हरम कुफ्र और इस्लाम के लोग
काबा ए दिल में जो देखें मिरे बुत खाना ए इश्क

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