Nakhre Shayari नखरें शायरी हिंदी में (2022-23)

Nakhre Shayari In Hindi | नखरे शायरी हिंदी में

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Nakhre Shayari
कोई खुश जौक ही शाहिद ये नुक्ता जान सकता है
कि मेरे और नखरे तुम्हारे एक जैसे हैं

अगर ऐ नाखुदा तूफान से लड़ने का दम खम है
इधर कश्ती न ले आना यहाँ पानी बहुत कम है

ऐ नक्श कर रहा था जिन्हें गर्क नाखुदा
तूफाँ के जोर से वो सफीने उभर गए

नाखुदा हो कि खुदा देखते रह जाते हैं
कश्तियाँ डूबती हैं उस के मकीं डूबते हैं

नाखुदा डूबने वालों की तरफ मुड़ के न देख
न करेंगे न किनारों की तमन्ना की है

नाखुदा देख रहा है कि मैं गिर्दाब में हूँ
और जो पुल पे खड़े लोग हैं अखबार से हैं

तमाम नाखुदा साहिल से दूर हो जाएँ
समुंदरों से अकेले में बात करनी है

ना खुदा छोड़ गए बीच भँवर में तो जफर
एक तिनके के सहारे ने कहा बिस्मिल्लाह

खुदा और नाखुदा मिल कर डुबो दें ये तो मुमकिन है
मेरी वज्ह ए तबाही सिर्फ तूफाँ हो नहीं सकता

मुझे ऐ नाखुदा आखिर किसी को मुँह दिखाना है
बहाना कर के तन्हा पार उतर जाना नहीं आता

मुझे रोकेगा तू ऐ नाखुदा क्या गर्क होने से
कि जिन को डूबना है डूब जाते हैं सफीनों में

लो डूबतों ने देख लिया नाखुदा को आज
तकरीब कुछ तो बहर ए मुलाकात हो गई

ना खुदा ने मुझे दलदल में फंसाए रक्खा
डूब मरने न दिया पार उतरने न दिया

हमें खुदा पे भरोसा है ना खुदा पे नहीं
खुदा जो देता है वो ना खुदा नहीं देता

तुम्हीं तो हो जिसे कहती है नाखुदा दुनिया
बचा सको तो बचा लो कि डूबता हूँ मैं

मिरे नाखुदा न घबरा ये नजर है अपनी अपनी
तिरे सामने है तूफाँ मिरे सामने किनारा

किनारों से मुझे ऐ ना खुदाओ दूर ही रक्खो
वहाँ ले कर चलो तूफाँ जहाँ से उठने वाला है

नाखुदा मौजों की इस नर्म खिरामी पे न जा
यही मौजें तो बदल जाती हैं तूफानों में

कौन एहसान ए ना खुदाई ले
इस से बेहतर तो डूब जाना है

ऐ मिरे पायाब दरिया तुझ को ले कर क्या करूँ
नाखुदा पतवार कश्ती बादबाँ रखते हुए

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