Naraj Shayari नाराज शायरी हिंदी में (2022-23)

Naraj Shayari In Hindi | नाराज शायरी हिंदी में

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Naraj Shayari

ऐ गम ए जिंदगी न हो नाराज
मुझ को आदत है मुस्कुराने की

फकत तुम ही नहीं नाराज मुझ से जान ए जानाँ
मिरे अंदर का इंसाँ तक खफा है इंतिहा है

बजा है जिंदगी से हम बहुत रहे नाराज
मगर बताओ खफा तुम से भी कभू हुए हैं

नावक अंदाज जिधर दीदा ए जानाँ होंगे
नीम बिस्मिल कई होंगे कई बे जाँ होंगे

इक निगाह ए गलत अंदाज सही
दिल की आखिर कोई कीमत होगी

दोस्त नाराज हो गए कितने
इक जरा आइना दिखाने में

माँ मुझे देख के नाराज न हो जाए कहीं
सर पे आँचल नहीं होता है तो डर होता है

तुम यूँ ही नाराज हुए हो वर्ना मय खाने का पता
हम ने हर उस शख्स से पूछा जिस के नैन नशीले थे

अजीब शख्स है नाराज हो के हँसता है
मैं चाहता हूँ खफा हो तो वो खफा ही लगे

अगर मजहब खलल अंदाज है मुल्की मकासिद में
तो शैख ओ बरहमन पिन्हाँ रहें दैर ओ मसाजिद में

मुझ से नाराज हैं जो लोग वो खुश हैं उन से
मैं जुदा चीज हूँ नातिक मिरे अशआ र जुदा

इतना नाराज हो क्यूँ उस ने जो पत्थर फेंका
उस के हाथों से कभी फूल भी आया होगा

ये हादसा है कि नाराज हो गया सूरज
मैं रो रहा था लिपट कर खुद अपने साए से

मुझ से नाराज भी नहीं है वो
और उस को मना रहा हूँ मैं

ईद ए नौ रोज दिल अपना भी कभी खुश करते
यार आगोश में खुर्शीद हमल में होता

नाज ओ अंदाज की कीमत है तिरे मेरे सबब
किस की महफिल में भला और गजब ढाओगे

मुँह न दिखलावे न दिखला पर ब अंदाज ए इताब
खोल कर पर्दा जरा आँखें ही दिखला दे मुझे

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