नसीहत शायरी – Nasihat Shayari in Hindi

Nasihat Shayari

नहीं बख़्शी है कैफ़िय्यत नसीहत ख़ुश्क ज़ाहिद की
जला देव आतिश ए सहबा सीं इस कड़बी के पोले कूँ !

फ़ाएदा क्या है नसीहत से फिरे हो नासेह
हम समझने के नहीं लाख तू समझाए हमें !

कल थके हारे परिंदों ने नसीहत की मुझे
शाम ढल जाए तो मोहसिन तुम भी घर जाया करो !

नासेहा मत कर नसीहत दिल मिरा घबराए है
मैं उसे समझूँ हूँ कब जो तुझ से समझा जाए है !

किया करते हो तुम नासेह नसीहत रात दिन मुझ को
उसे भी एक दिन कुछ जा के समझाते तो क्या होता !

मेरी ही जान के दुश्मन हैं नसीहत वाले
मुझ को समझाते हैं उन को नहीं समझाते हैं !

आते हैं अयादत को तो करते हैं नसीहत
अहबाब से ग़म ख़्वार हुआ भी नहीं जाता !

मुझी को वाइज़ा पंद ओ नसीहत
कभी उस को भी समझाया तो होता !

न मानूँगा नसीहत पर न सुनता मैं तो क्या करता
कि हर हर बात में नासेह तुम्हारा नाम लेता था !

अहल ए नसीहत जितने हैं हाँ उन को समझा दें ये लोग
मैं तो हूँ समझा समझाया मुझ को क्या समझाते हैं !

फीकी है तेरी नसीहत साथ मेरे ग़ुल मचा
शोर से नासेह नमक आ जाएगा तक़रीर में !

मय से ग़रज़ नशात है किस रू सियाह को
इक गूना बे ख़ुदी मुझे दिन रात चाहिए !

रुक गया आ के जहाँ क़ाफ़िला ए रंग ओ नशात
कुछ क़दम आगे ज़रा बढ़ के मकाँ है मेरा !

नशात ए हुस्न हो जोश ए वफ़ा हो या ग़म ए इश्क़
हमारे दिल में जो आए वो आरज़ू हो जाए !

चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव ए यास रहता हूँ
तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ !

दिल के अज्ज़ा में नहीं मिलता कोई जुज़्व ए निशात
इस सहीफ़े से किसी ने इक वरक़ कम कर दिया !

सुन नसीहत मिरी ऐ ज़ाहिद ए ख़ुश्क
अश्क के आब बिन वुज़ू मत कर !

दोस्तो क्या क्या दिवाली में नशात ओ ऐश है
सब मुहय्या है जो इस हंगाम के शायाँ है शय !

ग़म ओ नशात की हर रहगुज़र में तन्हा हूँ
मुझे ख़बर है मैं अपने सफ़र में तन्हा हूँ !