Nigahen Shayari निगाहें शायरी हिंदी में (2022-23)

Nigahen Shayari In Hindi | निगाहें शायरी हिंदी में

* Shayari In Hindi (* हिंदी में) सम्बंधित हर शायरी पोस्ट के अन्दर है.Nigahen Shayari In Hindi | निगाहें शायरी हिंदी में * Shayari In Hindi (* हिंदी में) सम्बंधित हर शायरी पोस्ट के अन्दर है.

Nigahen Shayari
गम्जा भी हो सफ्फाक निगाहें भी हों खूँ रेज
तलवार के बाँधे से तो कातिल नहीं होता

वो काफिर निगाहें खुदा की पनाह
जिधर फिर गईं फैसला हो गया

हवस गिरफ्ता हवाओ निगाहें नीची रखो
शजर खड़े हैं सड़क के करीन बे पर्दा

न मिजाज ए नाज ए जल्वा कभी पा सकीं निगाहें
कि उलझ के रह गई हैं तिरी जुल्फ ए खम ब खम में

भरी दुनिया में फकत मुझ से निगाहें न चुरा
इश्क पर बस न चलेगा तिरी दानाई का

निगाहें करती रह जाती हैं हिज्जे
वो जब चेहरे से इमला बोलता है

निगाहें मुंतजिर हैं किस की दिल को जुस्तुजू क्या है
मुझे खुद भी नहीं मालूम मेरी आरजू क्या है

जबीं पर सादगी नीची निगाहें बात में नरमी
मुखातिब कौन कर सकता है तुम को लफ्ज ए कातिल से

बुझी हुई हैं निगाहें गुबार है कि धुआँ
वो रास्ता है कि अपना भी नक्श ए पा न मिले

बे साख्ता निगाहें जो आपस में मिल गईं
क्या मुँह पर उस ने रख लिए आँखें चुरा के हाथ

पलट गईं जो निगाहें उन्हीं से शिकवा था
सो आज भी है मगर देर हो गई शायद

कहे देती हैं ये नीची निगाहें
कि बाला ए जमीं क्या क्या न होगा

देखी हैं बड़े गौर से मैं ने वो निगाहें
आँखों में मुरव्वत का कहीं नाम नहीं है

उस ने इस तरह मोहब्बत की निगाहें डालीं
हम से दुनिया का कोई राज छुपाया न गया

नजर जिस की तरफ कर के निगाहें फेर लेते हो
कयामत तक फिर उस दिल की परेशानी नहीं जाती

निगाहें कामिलों पर पड़ ही जाती हैं जमाने की
कहीं छुपता है अकबर फूल पत्तों में निहाँ हो कर

Read Also:Mukabala Shayari 
Read Also:Insaaniyat Shayari 
Read Also:Masroof Shayari