Pahchan Shayari पहचान शायरी हिंदी में (2022-23)

Pahchan Shayari In Hindi | पहचान शायरी हिंदी में

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Pahchan Shayari पहचान शायरी हिंदी में (2022-23) In Hindi

Pahchan Shayari

हाँ ऐ गम ए इश्क मुझ को पहचान
दिल बन के धड़क रहा हूँ कब से

वक्त देता है जो पहचान तो ये देखता है
किस ने किस दर्द में दिल की खुशी रक्खी हुई है

Pahchan Shayari पहचान शायरी हिंदी में (2022-23) हिंदी में

तेरी पहचान के लाखों अंदाज
सर झुकाना ही इबादत तो नहीं

Pahchan Shayari पहचान शायरी हिंदी में (2022-23) 2 line

इस रंग बदलती दुनिया में पहचान बड़ी ही मुश्किल है
ये किस को खबर है ऐ शाहिद किस भेस में कौन लुटेरा है

कमरे में धुआँ दर्द की पहचान बना था
कल रात कोई फिर मिरा मेहमान बना था

बंद आँखें जब खुलीं तो रौशनी पहचान ली
बे खबर हम हों तो हों पर बे बसर इतने न थे

जिंदगी खुद को न इस रूप में पहचान सकी
आदमी लिपटा है ख्वाबों के कफन में ऐसा

जिन के मजबूत इरादे बने पहचान उन की
मंजिलें आप ही हो जाती हैं आसान उन की

बाग में होना ही शायद सेब की पहचान थी
अब कि वो बाजार में है अब तो बिकना है उसे

तुम को भी पहचान नहीं है शायद मेरी उलझन की
लेकिन हम मिलते रहते तो अच्छा ही रहता जानम

शौकत वो आज आप को पहचान तो गए
अपनी निगाह में जो कभी आसमाँ रहे

देखने वाली अगर आँख को पहचान सकें
रंग खुद पर्दा ए तस्वीर से बाहर हो जाएँ

पहचान भी सकी न मिरी जिंदगी मुझे
इतनी रवा रवी में कहीं सामना हुआ

वो उर्दू का मुसाफिर है यही पहचान है उस की
जिधर से भी गुजरता है सलीका छोड़ जाता है

दूर से देख के मैं ने उसे पहचान लिया
उस ने इतना भी नहीं मुझ से कहा कैसे हो

पहचान जिन से थी वो हवाले मिटा दिए
उस ने किताब ए जात का सफ्हा बदल दिया

मेरी पोशाक तो पहचान नहीं है मेरी
दिल में भी झाँक मिरी जाहिरी हालत पे न जा

हवा में खुशबुएँ मेरी पहचान बन गई थीं
मैं अपनी मिट्टी से फूल बन कर उभर रहा था

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