Pareshan Shayari परेशान शायरी हिंदी में (2022-23)

Pareshan Shayari In Hindi | परेशान शायरी हिंदी में

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Pareshan Shayari
शब ए हिज्राँ की दराजी से परेशान न था
ये तेरी जुल्फ ए रसा है मुझे मालूम न था

खाक मैं उस की जुदाई में परेशान फिरूँ
जब कि ये मिलना बिछड़ना मिरी मर्जी निकला

इस तरह सताया है परेशान किया है
गोया कि मोहब्बत नहीं एहसान किया है

जेहन पर बोझ रहा, दिल भी परेशान हुआ
इन बड़े लोगों से मिल कर बड़ा नुकसान हुआ

सुम्बुल को परेशान किया बाद ए सबा ने
जब बाग में बातें तिरी जुल्फों की चलाईं

मुझे भी अक्ल परेशान करती रहती है
नहीं नहीं से गुजर कर मैं हाँ पे आया हूँ

हम तेरे पास आ के परेशान हैं बहुत
हम तुझ से दूर रहने को तय्यार भी नहीं

ढूँढ हम उन को परेशान बने बैठे हैं
वो तो पर्दा लिए इंसान बने बैठे हैं

लोग ये सोच के ही परेशान हैं
मैं जमीं था तो क्यूँ आसमाँ हो गया

तुम मेरे लिए इतने परेशान से क्यूँ हो
मैं डूब भी जाता तो कहीं और उभरता

रात तो सारी गई सुनते परेशाँ गोई
मीर जी कोई घड़ी तुम भी तो आराम करो

फिरते हैं कई कैस से हैरान ओ परेशान
इस इश्क की सरकार में बहबूद नहीं है

मैं परेशाँ था परेशाँ हूँ नई बात नहीं
आज तो वो भी परेशाँ हैं खुदा खैर करे

परेशाँ हो के दिल तर्क ए तअल्लुक पर है आमादा
मोहब्बत में ये सूरत भी न रास आई तो क्या होगा

इस चश्म ए सियह मस्त पे गेसू हैं परेशाँ
मय खाने पे घनघोर घटा खेल रही है

परेशाँ है वो झूटा इश्क कर के
वफा करने की नौबत आ गई है

अपने दिल ए बेताब से मैं खुद हूँ परेशाँ
क्या दूँ तुम्हें इल्जाम मैं कुछ सोच रहा हूँ

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