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फूल शायरी | Phool Shayari

फूल शायरी | Phool Shayari In Hindi

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फूल शायरी | Phool Shayari In Hindi | फूल शायरी | Phool Shayari हिंदी में

Phool Shayari

Phool Shayari

फूल तो दो दिन बहार ए जाँ फ़ज़ा दिखला गए
हसरत उन ग़ुंचों पे है जो बिन खिले मुरझा गए !

चराग़ चाँद शफ़क़ शाम फूल झील सबा
चुराईं सब ने ही कुछ कुछ शबाहतें तेरी !

शाम ए अवध ने ज़ुल्फ़ में गूँधे नहीं हैं फूल
तेरे बग़ैर सुब्ह ए बनारस उदास है !

शगुफ़्ता फूल जो देखे तो शौक़ याद आया
दिए थे दाग़ भी गुलशन ने बे शुमार मुझे !

फूल शायरी | Phool Shayari हिंदी में पढ़िए

हर शाख़ ए चमन है अफ़्सुर्दा हर फूल का चेहरा पज़मुर्दा
आग़ाज़ ही जब ऐसा है तो फिर अंजाम ए बहाराँ क्या होगा !

हर अश्क ए सुर्ख़ है दामान ए शब में आग का फूल
बग़ैर शम्अ के भी जल रहे हैं परवाने !

फूल पर गुलशन के गोया दाना ए शबनम नहीं
आशिक़ों के हाल पर आँखें फिराती है बहार !

फेंक दे ख़ुश्क फूल यादों के
ज़िद न कर तू भी बे वफ़ा हो जा !

महकते फूल सितारे दमकता चाँद धनक
तिरे जमाल से कितनों ने इस्तिफ़ादा क्या !

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मिरे दाग़ ए जिगर को फूल कह कर
मुझे काँटों में खींचा जा रहा है !

ऐ वतन जब भी सर ए दश्त कोई फूल खिला
देख कर तेरे शहीदों की निशानी रोया !

इस दश्त ए सुख़न में कोई क्या फूल खिलाए
चमकी जो ज़रा धूप तो जलने लगे साए !

शम्अ हूँ फूल हूँ या रेत पे क़दमों का निशाँ
आप को हक़ है मुझे जो भी जी चाहे कह लें !

टेसू के फूल दश्ना ए ख़ूनी हुए उसे
ब्रिहन के जी कूँ है ये कसाई बसंत रुत !

जो फूल आया सब्ज़ क़दम हो के रह गया
कब फ़स्ल ए गुल है फ़स्ल ए तरब अपने शहर में !

फूल ही फूल याद आते हैं
आप जब जब भी मुस्कुराते हैं !

फूल अफ़्सुर्दा बुलबुलें ख़ामोश
फ़स्ल गुल आई है ख़िज़ाँ बर दोश !

फूल कह देने से अफ़्सुर्दा कोई होता है
सब अदाएँ तिरी अच्छी हैं नज़ाकत के सिवा !

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