Political Shayari | 321+ पॉलिटिक्स शायरी

They Will Tell You All About Political Shayari. Learn Exactly How We Made Political Shayari Last Month. Why Most People Will Never Be Great At Political Shayari.

10 Secret Things You Didn’t Know About Political Shayari. If Political Shayari Is So Terrible, Why Don’t Statistics Show It?. The Number One Reason You Should (Do) Political Shayari.Political Shayari

 

मूल जानना बड़ा कठिन हैं नदियों का, वीरो का,
धनुष छोड़कर और गोत्र क्या होता हैं रणधीरो का,
पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर,
“जाति-जाति” का शोर मचाते केवल कायर, क्रूर.

 

जहाँ सच हैं, वहाँ पर हम खड़े हैं,
इसी खातिर आँखों में गड़े हैं.

 

नेता की बातों में सच्चाई का अभाव होता है,
झूठ बोलना तो इनका स्वभाव होता हैं.

 

नेता भी क्या खूब ठगते हैं,
ये तो 5 साल बाद ही दिखते हैं.

 

नजर वाले को हिन्दू और मुसलमान दिखता हैं,
मैं अन्धा हूँ साहब, मुझे तो हर शख्स में इंसान दिखता हैं.

 

मैं अपनी आँख पर चशमाँ चढ़ा कर देखता हूँ
हुनर ज़ितना हैं सारा आजमा कर देखता हूँ
नजर उतना ही आता हैं की ज़ितना वो दिखाता है
मैं छोटा हू मगर हर बार कद अपना बढ़ा कर देखता हूँ

 

लोकतंत्र जब अपने असली रंग में आता हैं,
तो नेताओं की औकात का पता चल जाता हैं.

 

तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था,
उस को भी अपने ख़ुदा होने पे इतना ही यक़ीं था.