प्रेम शायरी – Prem Shayari in Hindi

Prem Shayari

आज भी प्रेम के और कृष्ण के अफ़्साने हैं
आज भी वक़्त की जम्हूरी ज़बाँ है उर्दू !

हम सहरा वाले हैं बदरा ये प्रेम की रिम झिम और कहीं
आना है यहाँ तो आईयो तू जम कर झम झम करने के लिए !

ग्रंथ इक प्रेम का पढ़ा मुझ को
और किताबों का ज्ञान रहने दे !

तुझ ज़ुल्फ़ में दिल ने गुम किया राह
इस प्रेम गली कूँ इंतिहा नईं !

हमारी बात मोहब्बत सीं तुम जो गोश करो
तो अपनी प्रेम कहानी तुम्हें सुनाऊँगा !

पत्ता पत्ता शाख़ से टूटे दरवाज़ों पे वहशत सी
यारो प्रेम कथा में किस ने दर्द की तान मिलाई है !

अलख जमाए धूनी रमाए ध्यान लगाए रहते हैं
प्यार हमारा मस्लक है हम प्रेम गुरु के चेले हैं !

कैसे तन्हा रात कटेगी
यादों की गठरी ही खोलें !

सारी सारी रात मैं जागा
वो मेरी आँखों में सोया !

आग लगाई तुम ने ही तो
लोगों ने तो सिर्फ़ हवा दी !

शाम हुई तो सूरज सोचे
सारा दिन बेकार जले थे !

मेरी शोहरत के पीछे है
हाथ बहुत रुस्वाई का !

या तो दीवाना हँसे या तुम जिसे तौफ़ीक़ दो
वर्ना इस दुनिया में रह कर मुस्कुराता कौन है !

रंग तेरा उड़ा उड़ा सा है
लग गई है तुझे नज़र शायद !

मुझ को याद रहा तू भूला
बात है ये तो आदत की !

कुछ रिश्ते हैं जिन की ख़ातिर
जीते जी मरना होता है !

सारी बे रंग सोच के चेहरे
लफ़्ज़ पहनें तो फिर निखरते हैं !

जाने क्यूँ लोग मिरा नाम पढ़ा करते हैं
मैं ने चेहरे पे तिरे यूँ तो लिखा कुछ भी नहीं !

शंकर बना के लोग मुझे पूजते रहे
मजबूरियों में ज़हर निगलना पड़ा मुझे !

मैं तो सब कुछ भूल चुका हूँ
तू भूले तो बात बराबर !