Raaz Shayari राज़ शायरी हिंदी में (2022-23)

Raaz Shayari In Hindi | राज़ शायरी हिंदी में

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Raaz ShayariRaaz Shayari
वो एक राज़! जो मुद्दत से राज़ था ही नहीं
उस एक राज़ से पर्दा उठा दिया गया है

जरा करीब से देखूँ तो कोई राज़ खुले
यहाँ तो हर कोई लगता है आदमी जैसा

ये राज़ सुन रहे हैं इक मौज ए दिल नशीं से
डूबे हैं हम जहाँ पर उभरेंगे फिर वहीं से

दिल के पर्दों में छुपाया है तिरे इश्क का राज़
खल्वत ए दिल में भी पर्दा नजर आता है मुझे

हस्ती का राज क्या है गम ए हस्त ओ बूद है
आलम तमाम दाम ए रुसूम ओ क़़ुयूद है

है हुसूल ए आरजू का राज़ तर्क ए आरजू
मैं ने दुनिया छोड़ दी तो मिल गई दुनिया मुझे

भरी बज्म में राज़ की बात कह दी
बड़ा बे अदब हूँ सजा चाहता हूँ

अश्क काबू में नहीं राज़ छुपाऊँ क्यूँकर
दुश्मनी मुझ से मिरे दीदा ए तर रखते हैं

छुपता नहीं है दिल में कभी राज़ इश्क का
ये आग वो है जिस को नहीं ताब संग में

अश्कों ने राज़ दिल का किया जब कभी अयाँ
कितनी हुई है मुझ को नदामत न पूछिए

गैरों पे खुल न जाए कहीं राज़ देखना
मेरी तरफ भी गम्जा ए गम्माज देखना

उसे जिद कि वामिक ए शिकवा गर किसी राज़ से न हो बा खबर
मुझे नाज है कि ये दीदा वर मिरी उम्र भर की तलाश है

उम्र जूँ जूँ बढ़ती है दिल जवान होता है
राज़ ये हसीं गजलें इन सफेद बालों में

वो मेरे राज़ मुझ में चाहता है मुन्कशिफ करना
मुझे मेरे घने साए में तन्हा छोड़ जाता है

खुल गया उन की आरजू में ये राज़
जीस्त अपनी नहीं पराई है

दफ्न कर सकता हूँ सीने में तुम्हारे राज़ को
और तुम चाहो तो अफ्साना बना सकता हूँ मैं

राज़ दाँ होते हैं वो घर अक्सर
जिन घरों में धुआँ नहीं होता

हल कर लिया मजाज हकीकत के राज़ को
पाई है मैं ने ख्वाब की ताबीर ख्वाब में

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