Radha Krishna Shayari (राधा कृष्ण शायरी)

	 Radha Krishna Shayari

श्री राधा जहाँ-जहां श्री कृष्ण वहाँ-वहाँ है,
जो हृदय में बस जाएँ वो बिछड़ता कहाँ है.

 

राधा कृष्ण का मिलन तो एक बहाना था,
दुनिया को प्रेम का सही मतलब समझना था.

 

श्याम की बंसी जब भी बजी है,
राधा के मन में प्रीत जगी है.

 

प्रेम को भी खुद पर गुमान है क्योंकि,
राधा-कृष्ण का प्रेम हर दिल में विराजमान हैं.

 

हर शाम हर किसी के लिए सुहानी नहीं होती,
हर प्यार के पीछे कोई कहानी नहीं होती,
कुछ असर तो होता है दो आत्मा के मेल का
वरना गोरी राधा, सांवले कृष्णा की दीवानी न होती।

 

संगीत है श्रीकृष्ण, सुर है श्रीराधे
शहद है श्रीकृष्ण, मिठास है श्रीराधे
पूर्ण है श्रीकृष्ण, परिपूर्ण है श्रीराधे
आदि है श्रीकृष्ण, अनंत है श्रीराधे

 

दौलत छोड़ी शोहरत छोड़ी सारा खजाना छोड़ दिया,
कृष्णा के प्रेम दीवानों ने सारा जमाना छोड़ दिया.

 

कान्हा हरदम मेरे साथ है फिर क्या कमी है,
विरह में नहीं, प्रेम की वजह से आखों में नमी है.

 

राधा-कृष्ण की प्रेम कभी अधूरी नहीं रही,
वो हमेशा साथ रहे उनमें कोई दूरी नहीं रही.

 

प्रेम में प्रेमियों की आत्मा एक हो जाती है,
कोई बताएगा राधा से कृष्ण कब बिछड़े.

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Radha Krishna Shayari in Hindi – राधा कृष्ण शायरी इन हिंदी

प्रेम से राधा-राधा जपो हो जाएगा उद्धार,
यही वो नाम है जिससे मोहन करते प्यार।

कितने सुंदर नैन तेरे ओ राधा प्यारी,
इन नैनों में खो गये मेरे बांकेबिहारी।

श्याम की बंसी जब भी बजी है,
राधा के मन में प्रीत जगी है।

राधा-कृष्णा ही प्रेम की सबसे अच्छी परिभाषा है,
बिना कहे जो समझ में आ जाए, प्रेम ऐसी भाषा है।

कितनी खूबसूरत है राधा के ख्यालों की दुनिया,
माखन चोर से शुरू होती है और कृष्ण पर खत्म।

प्यार मे कितनी बाधा देखी,
फिर भी कृष्ण के साथ राधा देखी।

चारों तरफ फैल रही हैं,
इनके प्यार की खुशबू थोड़ी-थोड़ी,
कितनी प्यारी लग रही हैं,
साँवरे-गोरी की यह जोड़ी।

राधा की आँखें तरसी होंगी,
जब कान्हा मथुरा गये होंगे,
दिल भी बहुत रोया होगा,
जब वो रूक्मिणि के भये होंगे।

हम भी तेरी मोहनी मूरत दिल में छिपाये बैठे है,
तेरी सुन्दर सी छवि आँखों में बसाये बैठे है,
इक बार बांसुरी की मधुर तान सुनादे कान्हा,
हम भी एक छोटी सी आस जगाये बैठे है।

राधा ने श्री कृष्णा से पूछा,
प्यार का असली मतलब क्या होता है,
श्री कृष्णा ने हँस कर कहा,
जहाँ मतलब होता है वहां प्यार ही कहाँ होता है।

हो काल-गति से परे चिरंतन अभी वहाँ थे, अभी यहाँ हो,
कभी धरा पर, कभी गगन में, कभी कहाँ थे, कभी कहाँ हो,
तुम्हारी राधा को भान हैं तुम सकल चराचर में हो समायें,
बस एक मेरा हैं भाग्य मोहन कि जिसमें हो कर भी तुम नही हो।

सुध-बुध खो रही राधा रानी,
इंतजार अब सहा न जाएँ,
कोई कह दो सावरे से,
वो जल्दी राधा के पास आएँ।

कृष्ण की प्रेम बांसुरियां सुन कर हुई वो प्रेम दीवानी,
जब जब कान्हा मुरली बजाएं, दौड़ी दौड़ी आए राधा रानी।

कृष्ण की प्रेम बाँसुरिया सुन भई वो प्रेम दीवानी,
जब-जब कान्हा मुरली बजाए दौड़ी आये राधा रानी।

दे के दर्शन कर दो पूरी प्रभु मेरे मन की तृष्णा,
कब तक तेरी राह निहारूं, अब तो आओ कृष्णा।

पाने को ही प्रेम कहे, जग की ये है रीत,
प्रेम का सही अर्थ समझायेगी राधा-कृष्णा की प्रीत।

राधा कृष्ण का मिलन तो बस एक बहाना था,
दुनियाँ को प्यार का सही मतलब जो समझाना था।

हर पल आंखों में पानी हैं क्योंकि चाहत में रुहानी है,
मैं हूँ तुझसे, तू हैं मुझसे, राधा-कृष्ण की यही तो प्रेम कहानी है।

कृष्ण ने राधा से पूछा ऐसी एक जगह बताओ, जहाँ में नहीं हूँ,
राधा ने मुस्कुरा के कहा, बस मेरे नसीब में।

राधा कहती है दुनियावालों से,
तुम्हारे और मेरे प्यार में बस इतना अंतर है,
प्यार में पड़कर तुमने अपना सबकुछ खो दिया,
और मैंने खुद को खोकर सबकुछ पा लिया।

सुध-बुध खो रही राधा रानी,
इंतजार अब सहा न जाएँ,
कोई कह दो सावरे से,
वो जल्दी राधा के पास आएँ।

राधा के दिल की चाहत है कृष्णा,
राधा की विरासत है कृष्णा,
कितने भी रास रचा ले कृष्णा,
फिर भी दुनिया कहेगी – राधे कृष्णा।

कजरारी अँखिया राधा तेरी दिल को घायल कर जाती है,
कान की बाली केश का गजरा और पागल पायल कर जाती है,
बंसी होंठों पर चिपकाये मैं बस तुझको ही ढूँढा करता हूँ,
तेरी चंचल मीठी बोली राधा मुझको कायल कर जाती है।

राधे राधे बोल, श्याम भागे चले आएंगे,
एक बार आ गए तो कभी नहीं जायेंगे।

सुनो कन्हैया जहाँ से तेरा मन करे,
मेरी जिन्दगी को पड़ लो पन्ना,
चाहे कोई भी खोलो हर पन्ने पर,
तेरा नाम होगा मेरे कान्हा।

राधा ने किसी और की तरफ देखा हीं नहीं,
जब से वो कृष्ण के प्यार में खो गई,
कान्हा के प्यार में पड़कर,
वो खुद प्यार की परिभाषा हो गई।

कृष्ण की प्रेम बाँसुरिया सुन भई वो प्रेम दिवानी,
जब-जब कान्हा मुरली बजाएँ दौड़ी आये राधा रानी।

राधा को कन्हैया ने प्यार का पैगाम लिखा,
पूरे खत में सिर्फ़ राधा-राधा नाम लिखा।

हर पल, हर दिन कहता हैं कान्हा का मन,
तू कर ले पल-पल राधा का सुमिरन।

एक तरफ साँवले कृष्ण, दूसरी तरफ राधिका गोरी,
जैसे एक-दूसरे से मिल गए हों चाँद-चकोरी।

अब तो आँखों से भी जलन होती है मुझे ए कान्हा,
खुली हो तो तलाश तेरी और बंद हो तो ख्वाब तेरे।

कोई प्यार करे तो राधा-कृष्ण की तरह करे,
जो एक बार मिले, तो फिर कभी बिछड़े हीं नहीं।

अगर तुमने राधा के कृष्ण के प्रति समर्पण को जान लिया,
तो तुमने प्यार को सच्चे अर्थों में जान लिया।

राधा की चाहत है कृष्ण,
उसके दिल की विरासत है कृष्ण,
चाहे कितना भी रास रचा ले कृष्ण
दुनिया तो फिर भी यही कहती है, राधे कृष्ण राधे कृष्ण।

जिस पर राधा को मान है,
जिस पर राधा को गुमान है,
यह वही कृष्ण हैं जो राधा,
के दिल हर जगह विराजमान है।

हे कान्हा, तुम संग बीते वक़्त का,
मैं कोई हिसाब नहीं रखती,
मैं बस लम्हे जीती हूँ,
इसके आगे कोई ख्वाब नहीं रखती।

कितना भी धन-दौलत पा लो,
पर भूख नहीं मिटटी तृष्णा की,
उसको जीवन का सारा धन मिल जाता है,
जो भक्ति करें राधा के कृष्णा की।

राधा मुरली-तान सुनावें,
छीनि लियो मुरली कान्हा से कान्हा मंद-मंद मुस्कावे।
राधा ने धुन प्रेम की छेड़ी,
कृष्ण को तान पे,नाच नचावे।

आज वो पावन प्रेम कहाँ,
कहां उनसी प्रेम कहानी है,
कहां वो नटखट कृष्णा है,
कहाँ वो राधा दिवानी है ।

हर शाम हर किसी के लिए सुहानी नहीं होती,
हर प्यार के पीछे कोई कहानी नहीं होती,
कुछ असर तो होता है दो आत्मा के मेल का
वरना गोरी राधा, सांवले कृष्णा की दीवानी न होती।