Rooh Shayari रूह शायरी हिंदी में (2022-23)

Rooh Shayari In Hindi | रूह शायरी हिंदी में

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Rooh Shayari
फिराक दौड़ गई रूह सी जमाने में
कहाँ का दर्द भरा था मिरे फसाने में

आशिकों की रूह को ता लीम ए वहदत के लिए
जिस जगह अल्लाह रहता है वहाँ रहना पड़ा

मैं मुनक्कश हूँ तिरी रूह की दीवारों पर
तू मिटा सकता नहीं भूलने वाले मुझ को

रूह देती रही तर्गीब ए तअ ल्ली बरसों
हम मगर तेरी गली छोड़ के ऊपर न गए

जिस्म क्या रूह की है जौलाँ गाह
रूह क्या इक सवार ए पा ब रकाब

आखिर को रूह तोड़ ही देगी हिसार ए जिस्म
कब तक असीर खुशबू रहेगी गुलाब में

उकाबी रूह जब बेदार होती है जवानों में
नजर आती है उन को अपनी मंजिल आसमानों में

रूह ओ बदन में जारी है इक मा रका ए खूँ सदियों से
एक हवाला मिट्टी का है एक हवाला पानी का

मिरे साज ए नफस की खामुशी पर रूह कहती है
न आई मुझ को नींद और सो गया अफ्साना ख्वाँ मेरा

रूह से लिपटे दर्द के मंजर
टूट रहे हैं जख्म के पैकर

हर रूह पस ए पर्दा ए तरतीब ए अनासिर
ना कर्दा गुनाहों की सजा काट रही है

रूह की गहराई में पाता हूँ पेशानी के जख्म
सिर्फ चाहा ही नहीं मैं ने उसे पूजा भी है

टूट कर रूह में शीशों की तरह चुभते हैं
फिर भी हर आदमी ख्वाबों का तमन्नाई है

हो जाती है हवा कफस ए तन से छट के रूह
क्या सैद भागता है रिहा हो के दाम से

बदन ने छोड़ दिया रूह ने रिहा न किया
मैं कैद ही में रहा कैद से निकल के भी

वो खुदा है तो मिरी रूह में इकरार करे
क्यूँ परेशान करे दूर का बसने वाला

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