रूठना शायरी – Ruthna Shayari in Hindi

Ruthna Shayari

अदम बहुत ही अगर रूठने लगी उम्मीद
किसी के वादे पे फिर एतिबार कर लूँगा !

रूठने और मनाने के एहसास में है इक कैफ़ ओ सुरूर
मैं ने हमेशा उसे मनाया वो भी मुझे मनाए तो !

ऐ दिल ए नादाँ किसी का रूठना मत याद कर
आन टपकेगा कोई आँसू भी इस झगड़े के बीच !

अब न आएँगे रूठने वाले
दीदा ए अश्क बार चुप हो जा !

हर घड़ी का ये बिगड़ना नहीं अच्छा ऐ जान
रूठने का भी कोई वक़्त मुक़र्रर हो जाए !

सभी अपने नज़र आते हैं ब ज़ाहिर लेकिन
रूठने वाला है कोई न मनाने वाला !

दिखाए पाँच आलम इक पयाम ए शौक़ ने मुझ को
उलझना रूठना लड़ना बिगड़ना दूर हो जाना !

छेड़ हर वक़्त की नहीं जाती
रोज़ का रूठना नहीं जाता !

मिरे हर अमल को सराह कर ये अज़िय्यतें न दिया करो
मिरी जान तुम भी अजीब हो तुम्हें रूठना भी तो चाहिए !