Sabar Shayari सबर शायरी हिंदी में (2022-23)

Sabar Shayari In Hindi | सबर शायरी हिंदी में

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Sabar Shayari सबर शायरी हिंदी में (2022-23) In Hindi

Sabar Shayari
तुम ने क्यूँ दिल में जगह दी है बुतों को साबिर
तुम ने क्यूँ काबा को बुत खाना बना रक्खा है

शगुफ्ता बाग ए सुखन है हमीं से ऐ साबिर
जहाँ में मिस्ल ए नसीम ए बहार हम भी हैं

रह नवर्द ए बयाबान ए गम सब्र कर सब्र कर
कारवाँ फिर मिलेंगे बहम सब्र कर सब्र कर

Sabar Shayari सबर शायरी हिंदी में (2022-23) हिंदी में

हर चंद तुझे सब्र नहीं दर्द व लेकिन
इतना भी न मिलियो कि वो बदनाम बहुत हो

Sabar Shayari सबर शायरी हिंदी में (2022-23) 2 line

सब्र करना सख्त मुश्किल है तड़पना सहल है
अपने बस का काम कर लेता हूँ आसाँ देख कर

चारा ए दिल सिवाए सब्र नहीं
सो तुम्हारे सिवा नहीं होता

खुद कुशी जुर्म भी है सब्र की तौहीन भी है
इस लिए इश्क में मर मर के जिया जाता है

अगरचे रोज मिरा सब्र आजमाता है
मगर ये दरिया मुझे तैरना सिखाता है

सब्र ओ करार ए दिल मिरे जाने कहाँ चले गए
बिछड़े हुए न फिर मिले ऐसे हुए जुदा कि बस

सब्र की रिश्वत माँग रही हैं
साजन की पटवारी आँखें

तू मिरे सब्र का अंदाजा लगा सकता है
तेरी सोहबत में तिरा हिज्र गुजारा है मियाँ

होश ओ हवास सब्र ओ तवाँ सब ही जा चुके
कुछ जान ले कि अब तिरी बारी है जिंदगी

अजब कि सब्र की मीआद बढ़ती जाती है
ये कौन लोग हैं फरियाद क्यूँ नहीं करते

दामन ए सब्र के हर तार से उठता है धुआँ
और हर जख्म पे हंगामा उठा आज भी है

सब्र की ताब नहीं जिस को वो दिल है मेरा
रहम का नाम नहीं जिस में वो तेरा दिल है

आगही कर्ब वफा सब्र तमन्ना एहसास
मेरे ही सीने में उतरे हैं ये खंजर सारे

सब्र की हद भी तो कुछ होती है
कितना पलकों पे सँभालूँ पानी

सब्र करती ही रही बे चारगी
जुल्म होता ही रहा मजलूम पर

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