Sahab Shayari साहब शायरी हिंदी में (2022-23)

Sahab Shayari In Hindi | साहब शायरी हिंदी में

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Sahab Shayari
शहर जब खुद कफील है साहब
कौन किस का मलाल करता है

जीते जी कद्र बशर की नहीं होती साहब
याद आएगी तुम्हें मेरी वफा मेरे बा द

जिंदगी वक्त के सफ्हों में निहाँ है साहब
ये गजल सिर्फ किताबों में नहीं मिलती है

मय कदा है शैख साहब ये कोई मस्जिद नहीं
आप शायद आए हैं रिंदों के बहकाए हुए

तुम्हें गर खुश जबाँ होना है साहब
तो लो मुँह में जरा मेरी जबाँ को

शैख साहब खुदा से डरते हों
मैं तो अंग्रेजों ही से डरता हूँ

दिल लिया है तो खुदा के लिए कह दो साहब
मुस्कुराते हो तुम्हीं पर मिरा शक जाता है

आँखें दिखलाते हो जोबन तो दिखाओ साहब
वो अलग बाँध के रक्खा है जो माल अच्छा है

शैख साहब से रस्म ओ राह न की
शुक्र है जिंदगी तबाह न की

रुलाएगी मिरी याद उन को मुद्दतों साहब
करेंगे बज्म में महसूस जब कमी मेरी

दिला दे हम को भी साहब से लोएलटी का परवाना
कयामत तक रहे सय्यद तिरे आनर का अफ्साना

मीर साहब तुम फरिश्ता हो तो हो
आदमी होना तो मुश्किल है मियाँ

कुफ्र ओ इस्लाम के झगड़े को चुका दो साहब
जंग आपस में करें शैख ओ बरहमन कब तक

इक जरा चैन भी लेते नहीं ताबिश साहब
मुल्क ए गम से नए फरमान निकल आते हैं

मुझ को शायर न कहो मीर कि साहब मैं ने
दर्द ओ गम कितने किए जम्अ तो दीवान किया

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