Saheed Shayari शहीद शायरी हिंदी में (2022-23)

Saheed Shayari In Hindi | शहीद शायरी हिंदी में

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Saheed Shayari शहीद शायरी हिंदी में (2022-23) In Hindi

Saheed Shayari
हो कर शहीद इश्क में पाए हजार जिस्म
हर मौज ए गर्द ए राह मिरे सर को दोश है

कौन कहता है कि फिर खाक से उठते हैं शहीद
सर उठा सकते हैं मारे तिरी तलवारों के

बुला के बात भी की और मुस्कुरा भी दिया
किया शहीद भी कातिल ने खूँ बहा भी दिया

Saheed Shayari शहीद शायरी हिंदी में (2022-23) हिंदी में

कातिल तिरी गली भी बदायूँ से कम नहीं
जिस के कदम कदम पे मजार ए शहीद है

Saheed Shayari शहीद शायरी हिंदी में (2022-23) 2 line

मिरे जज्बे मिरी शहादत हैं
बहते आँसू शहीद करती हूँ

न इंतिजार करो इन का ऐ अजा दारो
शहीद जाते हैं जन्नत को घर नहीं आते

अकबर दबे नहीं किसी सुल्ताँ की फौज से
लेकिन शहीद हो गए बीवी की नौज से

खुदा भी कैसा हुआ खुश मिरे करीने पर
मुझे शहीद का दर्जा मिला है जीने पर

ये बात सच है कि मरना सभी को है लेकिन
अलग ही होती है लज्जत निगाह ए कातिल की

डूबा सफीना जिस में मुसाफिर कोई न था
लेकिन भरे हुए थे वहाँ ना खुदा बहुत

मौला से मग्फिरत के अलावा दुआ में शाद
कुछ और माँगने की जसारत कभी न की

शाद गैर मुमकिन है शिकवा ए बुताँ मुझ से
मैं ने जिस से उल्फत की उस को बा वफा पाया

मंजिल ए इबरत है दुनिया अहल ए दुनिया शाद हैं
ऐसी दिल जमई से होती है परेशानी मुझे

चश्म पोशों से रहूँ शाद मैं क्या आईना दार
मुँह पे काना नहीं कहता है कोई काने को

गर देखिए तो खातिर ए नाशाद शाद है
सच पूछिए तो है दिल ए नाकाम काम का

शाद इतनी बढ़ गई हैं मेरे दिल की वहशतें
अब जुनूँ में दश्त और घर एक जैसे हो गए

वो किसी के हैं मैं किसी का हूँ मगर एक रब्त है आज तक
वही एहतियात ए निगाह है वही एहतियात ए कलाम है

कोई भी यकीं दिल को शाद कर नहीं सकता
रूह में उतर जाए जब गुमाँ की तन्हाई

जीते जी होजिए वाहिद शाहिद
कुछ कयामत में न काम आएगा

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