Takleef Shayari | तकलीफ़ शायरी

तकलीफ़ शायरी – Takleef Shayari in Hindi

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कौन कहता है की जिंदगी तकलीफ देती है,
अगर तुम जैसे दोस्त साथ हो,
तो जिंदगी भी सर झुका देती है।

 

तकलीफ की सुरंगो से,
जब जिन्दगी गुजरती है,
सबसे पहले अपनो के,
हाथ और साथ छुट जाते है।

 

कुछ लड़कियों की तकलीफ को,
लोग क्या समझेंगे,
उनका तो आधी रात को भी,
गोलगप्पे खाने का मन करता है।

 

तुम्हें हमारी तकलीफों से वाकिफ कराएँगे,
वक़्त बदलने दो हम भी तुम्हें तड़पाएँगे,
तुम तड़पते रहोगे हमें पाने के लिए,
हम किसी और के हो जाएंगे।

 

काश कोई मेरे लिए गम सहे,
काश कोई मेरी वजह से जिंदा रहे,
काश कोई हो ऐसा जो ज़िन्दगी में,
हमारी तकलीफ को अपनी कहे।

 

ज़िन्दगी हमारी और हिस्सा आप हो,
तकलीफ हमारी और हमदर्द आप हो,
समझ नहीं आता हम आपके हे या आप हमारे,
जैसे मेरी हर मुश्किलों के हल हे आपके सवारे।

 

जाती हुई मय्यत देख के भी,
वल्लाह तुम उठ कर आ न सके,
दो चार क़दम तो दुश्मन भी,
तकलीफ़ गवारा करते हैं।

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Takleef Shayari in Hindi – तकलीफ शायरी इन हिंदी

जिंदगी गुजर ही जाती है, तकलीफें कितनी भी हो,
मौत भी रोकी नहीं जाती, तरकीबें कितनी भी हो।

मौत सिर्फ नाम से बदनाम है,
वरना तकलीफ़ तो जिंदगी ही ज्यादा देती है,
और बीवी बी सिर्फ नाम से बदनाम है,
वरना तकलीफ़ में सिर्फ वही साथ देती है।

चेहरे अजनबी हो भी जायें,
तो कोई बात नहीं लेकिन,
रवैये अजनबी हो जाये,
तो ज़िन्दगी भर बड़ी तकलीफ देते हैं।

हमारे दिल में हर रोज़ एक सवाल आता है,
वो सवाल हमें तकलीफ से तड़पाता है,
के जो भी वफ़ा करता है इश्क़ में,
वो अक्सर अकेला क्यों रह जाता है।

ज़िन्दगी में जितना बडा सपना देखोगे,
उतनी ही बडी तकलीफें होगी,
और जितनी बडी तकलीफें होगी उतनी,
बडी कामयाबी होगी।

ए मेरी जिन्दगी यूँ मुझसे दगा ना कर,
उसे भुला कर जिन्दा रहू दुआ ना कर,
कोई उसे देखता हैं तो होती हैं तकलीफ,
ए हवा तू भी उसे छुवा ना कर।

तुम्हारा रूठ जाना हमें तड़पाता है,
तेरा गैरों से बात करना दिल जलाता है,
हमें देख कर तेरा अनदेखा कर देना,
दिल को दर्द और तकलीफ दे जाता है।

पत्थरों से प्यार किया नादान थे हम,
गलती हुई क्योकि इंसान थे हम,
आज जिन्हें नज़रें मिलाने में तकलीफ होती हैं,
कभी उसी शख्स की जान थे हम।

कौन कहता है की जिंदगी तकलीफ देती है,
अगर तुम जैसे दोस्त साथ हो,
तो जिंदगी भी सर झुका देती है।

तुम्हें हमारी तकलीफों से वाकिफ कराएँगे,
वक़्त बदलने दो हम भी तुम्हें तड़पाएँगे,
तुम तड़पते रहोगे हमें पाने के लिए,
हम किसी और के हो जाएंगे।

कीमत बता तू मुझे,
सजा-ए-मोहब्बत से रिहाई की,
बहुत तकलीफ होती है,
तेरी यादों की सलाखों में।

ढाई अक्षर की बात कहने में,
कितनी तकलीफ उठा रखी है,
तूने आँखों में छिपा रखी है,
मैंने होंठो पे दबा रखी है।

तुम मुझे दर्द देकर अगर खुश हो तो,
मैं तेरी खुशी में खुश हो जाऊंगा,
मुझे जितनी तकलीफ देनी है दे लो,
मैं तेरा दिया हर एक गम सहता जाऊंगा।

अच्छे दोस्त हाथऔर आँख की तरह होते हैं,
जब हाथ को तकलीफ होती है तो आँख रोती है,
और जब आँख रोती है तो हाथ आँसू पोछते हैं।

शाम सूरज को ढलना सिखाती है,
शमा परवाने को जलना सिखाती है,
गिरने वाले को होती तो है तकलीफ ,
पर ठोकर इंसान को चलना सिखाती है।

बहुत से लोगों को छोड़ मै तेरे पास आया था,
तुम्हें अपना समझा तुमने मुझे ठुकराया था,
तुमसे हम आस करते थे ख़ुशियों की मगर,
तू हमारी ज़िंदगी में तकलीफ लेकर आया था।

जिन्दगी में दो लोग बहुत तकलीफ देते है,
एक वो जिससे प्यार न हो और उसके साथ रहना पड़े,
दूसरा वो जिससे हद से ज्यादा प्यार हो,
और उसके बिना रहना पड़े।

हम रहते थे जो खुश,
उसने हमे उदास कर दिखाया है,
हम जानते ना थे क्या होता है दर्द,
उस बेवफा ने तकलीफ से वाकिफ कराया है।

एक वो ही था जो मेरी तकलीफ समझ पाता था,
मेरे रूठ जाने पर मुझे जानी कह कर मनाता था,
ना जाने वो आज कैसे बदल गया,
जो हमें उदास देखकर खुश उदास हो जाता था।

जाती हुई मय्यत देख के भी,
वल्लाह तुम उठ कर आ न सके,
दो चार क़दम तो दुश्मन भी,
तकलीफ़ गवारा करते हैं।

दुनिया उन्हीं की खैरियत पूछती है,
जो पहले से ही खुश हों,
जो तकलीफ में होते हैं,
उनके तो नंबर तक खो जाते है।

तकलीफ तो सबको हे कोई न कोई
सिर्फ खुशिया ज़िन्दगी में किसे मिल पाई है,
हमें तो जीना ही है हर हाल में यही पर,
तो फिर मुस्कुरा कर जीने में क्या बुराई है।

मेरे यार को मेरी तकलीफ और दर्द से,
कभी कुछ फर्क ही नहीं पड़ा,
मैं बेवकूफ की तरह खुद को तड़पा रहा हूं।

जनाजा मेरा उठ रहा था,
फिर भी तकलीफ थी उसे आने में,
बेवफा घर में बैठी पूछ रही थी,
और कितनी देर है दफनाने में।

उसने हमें बहुत आज़माया है,
इश्क़ में दर्द सहने के काबिल बनाया है,
जिससे हम पाना चाहते थे खुशियाँ,
उससे तकलीफों का भंडार पाया है।

किसी को तकलीफ देना मेरी आदत नहीं,
बिन बुलाया मेहमान बनना मेरी आदत नहीं,
मैं अपने गम में रहती हूँ नबाबों की तरह,
परायी ख़ुशी के पास जाना मेरी आदत नहीं।

तकलीफ की सुरंगो से,
जब जिन्दगी गुजरती है,
सबसे पहले अपनो के,
हाथ और साथ छुट जाते है।

मौत तो बेवजह बदनाम है,
तकलीफ तो ज़िन्दगी देती है,
जिसको हमने जान माना,
उसकी यादें ही जान लेती है।

यूँ चेहरे पर उदासी ना ओढिये साहब,
वक़्त ज़रूर तकलीफ का है,
लेकिन कटेगा मुस्कुराने से ही।

हाथ तो उनके भी ज़ख्मी हुए होंगे,
इस पत्थर दिल को तोड़ वो कहाँ खुश रहे होंगे,
जब तोड़ा होगा हमारा दिल बेरहमी से,
तकलीफ से उनके आँसू भी बहे होंगे।

ए खुदा काश तेरा भी एक खुदा होता तो,
तुझे भी ये अहसास होता कि,
दुआ कुबुल ना होने पे कितनी तकलीफ होती है।

कुछ लोग ज़िंदगी मे ऐसे होते हैं,
चाहे वो तकलीफ कितनी भी दें,
लेकिन उनसे मोहब्बत कभी कम नहीं होती।

किसी को तकलीफ़ देकर मुझसे,
अपनी ख़ुशी की दुआ मत करना लेकिन,
अगर किसी को एक पल की भी ख़ुशी देते हो,
तो अपनी तकलीफ़ की फ़िक्र मत करना।

तकलीफ होती है हमें जब तू,
किसी और से नज़रें मिलाता है,
तकलीफ होती है जब हमें बेगाना,
और गैरों को तू अपना बताता है।

मेरी फितरत में नहीं, अपना गम बयां करना,
अगर तेरे वजूद का हिस्सा हूँ, तो महसूस कर तकलीफ मेरी।

काश कोई मेरे लिए गम सहे,
काश कोई मेरी वजह से जिंदा रहे,
काश कोई हो ऐसा जो ज़िन्दगी में,
हमारी तकलीफ को अपनी कहे।

ए खुदा काश तेरा भी एक खुदा होता,
तो तुझे भी ये अहसास होता,
कि दुआ कुबुल ना होने पे कितनी तकलीफ होती है।

ज़िन्दगी में सिर्फ दर्द और गम पाया है,
जो हमारा था हमने वो गवाया है,
दूसरों को खुशी देने के लिए,
खुद को तकलीफ से वाकिफ कराया है।

मेरी फितरत मेँ नही,
अपना ग़म बयां करना,
अगर तेरे वजूद का हिस्सा हूँ,
तो महसूस कर तकलीफ मेरी ।

तकलीफ ये नहीं की,
किस्मत ने मुझे धोखा दिया,
तकलीफ तो ये है मेरा,
यकीन तुम पे था किस्मत पे नहीं।

आदत बना ली मैंने, खुद को तकलीफ देने की,
ताकि जब अपना कोई तकलीफ दे, तो तकलीफ ना हो।

देख के इनहे तुम्हे तकलीफ न हो कही,
अपना हर ज़ख़्म तुमसे छुपाते है,
तड़प न उठो मेरा महसूस कर काफी,
हम खामखा ही मुस्कुरा लेते हे।

कुछ लड़कियों की तकलीफ को,
लोग क्या समझेंगे,
उनका तो आधी रात को भी,
गोलगप्पे खाने का मन करता है।

ज़िन्दगी हमारी और हिस्सा आप हो,
तकलीफ हमारी और हमदर्द आप हो,
समझ नहीं आता हम आपके हे या आप हमारे,
जैसे मेरी हर मुश्किलों के हल हे आपके सवारे।

तकलीफ वो जो तड़पा दे, टीचर वो जो सजा दे,
मोहब्बत वो जो वफ़ा दे, दुश्मन वो जो मरवा दे,
और अपना वो, जो दिवाली की सफाई करवा दे।

कदर करलो उनकी जो तुमसे,
बिना मतलब की चाहत करते है,
दुनिया में ख्याल रखने वाले कम,
और तकलीफ देने वाले ज्यादा होते है।

निगाहों से कत्ल कर दे, ना हो तकलीफ दोनों को,
तुझे खंजर उठाने की, मुझे गरदन झुकाने की।

दिल की दास्ताँ भी बड़ी अजीब होती है,
बड़ी मुस्किल से इसे ख़ुशी नसीब होती है,
किसी के पास आने पर ख़ुशी हो न हो,
पर दूर जाने पर बड़ी तकलीफ होती है।

सारी रात तकलीफ देता है,
बस यही एक सवाल साहब,
के वफ़ा करने वाले अक्सर,
तनहा क्यों रह जाते है।

डूबता सूरज ढलता दिन,
क्यूँ इस कदर कचौटता हैं यह मुझे,
शायद तकलीफ करता हैं बयाँ,
फिर बिता एक दिन तेरे बिना।