तन्हाई शायरी | Tanhayi Shayari

Tanhayi Shayari | तन्हाई शायरी

Tanhayi Shayari In Hindi | तनहाई शायरी हिंदी में

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Tanhayi Shayari
शब की तन्हाई में उभरी हुई आवाज ए जरस
सुब्ह गाई का गजर हो ये जरूरी तो नहीं

अब किसी काम के नहीं ये रहे
दिल वफा इश्क और तन्हाई

उदासियाँ हैं जो दिन में तो शब में तन्हाई
बसा के देख लिया शहर ए आरजू मैं ने

कोई तन्हाई का गोशा कोई कुंज ए आफियत
आशिक ओ माशूक यकजा हों कहाँ ऐ आसमाँ

खुद अपने से मिलने का तो यारा न था मुझ में
मैं भीड़ में गुम हो गई तन्हाई के डर से

आधे घर में मैं होता हूँ आधे घर में तन्हाई
कौन सी चीज कहाँ रख दी है कौन मुझे बतलाएगा

वहशत ए हिज्र भी तन्हाई भी मैं भी अंजुम
जब इकट्ठे हुए सब एक गजल और कही

मैं अपनी जात की तन्हाई में मुकय्यद था
फिर इस चटान में इक फूल ने शिगाफ किया

असर होवे न होवे पर बला से जी तो बहलेगा
निकाला शग्ल तन्हाई में मैं नाचार रोने का

तुम्हारी खुश नसीबी है कि तुम समझे नहीं अब तक
अकेले पन में और तन्हाई में जो फर्क होता है

कहाँ का वस्ल तन्हाई ने शायद भेस बदला है
तिरे दम भर के मिल जाने को हम भी क्या समझते हैं

दर्द जब जब्त की हर हद से गुजर जाता है
ख्वाब तन्हाई की आगोश में सो जाते हैं

मुझे तन्हाई की आदत है मेरी बात छोड़ें
ये लीजे आप का घर आ गया है हात छोड़ें

दोस्तो तुम से गुजारिश है यहाँ मत आओ
इस बड़े शहर में तन्हाई भी मर जाती है

अजीब शय है तसव्वुर की कार फरमाई
हजार महफिल ए रंगीं शरीक ए तन्हाई

यूँ तो हर शख्स अकेला है भरी दुनिया में
फिर भी हर दल के मुकद्दर में नहीं तन्हाई

जाने कितना वक्त लगेगा खुद से बाहर आने में
तन्हाई का शोर बहुत है शहरों के वीराने में

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