तकदीर शायरी | Taqdeer Shayari

Taqdeer Shayari | तकदीर शायरी

Taqdeer Shayari In Hindi | तकदीर शायरी हिंदी में

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Taqdeer Shayari
शायद अगली इक कोशिश तकदीर बदल दे
जहर तो जब जी चाहे खाया जा सकता है

कोई तदबीर न तकदीर से लेना देना
बस यूँही फैसले जो होने हैं हो जाते हैं

तकदीर बदल दो मिरी हुर जैसा बना दो
हुर जैसा बना दो मिरी तकदीर बदल दो

रुस्वाई तो वैसे भी तकदीर है आशिक की
जिल्लत भी मिली हम को उल्फत के फसाने से

अगर तकदीर सीधी है तो खुद हो जाओगे सीधे
खफा बैठे रहो तुम को मनाने कौन आता है

खार की तरह मिली बाग ए जहाँ में तकदीर
जिस से लिपटूँ वो छुड़ा लेता है दामन अपना

इश्क ने मंसब लिखे जिस दिन मिरी तकदीर में
दाग की नकदी मिली सहरा मिला जागीर में

दर बदर की खाक थी तकदीर में
हम लिए काँधों पे घर चलते रहे

तकदीर के चेहरे की शिकन देख रहा हूँ
आईना ए हालात है दुनिया तेरी क्या है

देखिए क्या दिखाती है तकदीर
चुप खड़ा हूँ गुनाहगारों में

खुद गलत है जो कहे होती है तकदीर गलत
कहीं किस्मत की भी हो सकती है तहरीर गलत

है ये तकदीर की खूबी कि निगाह ए मुश्ताक
पर्दा बन जाए अगर पर्दा नशीं तक पहुँचे

मिरी तकदीर से पहले सँवरना जिन का मुश्किल है
तिरी जुल्फों में कुछ ऐसे भी खम महसूस करता हूँ

खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले
खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है

हो के अफ्सुर्दा मिरी शूमी ए तकदीर न देख
अपने पैरों में मिरे पाँव की जंजीर न देख

कहो क्या मेहरबाँ ना मेहरबाँ तकदीर होती है
कहा माँ की दुआओं में बड़ी तासीर होती है

ये किस ने कहा है मिरी तकदीर बना दे
आ अपने ही हाथों से मिटाने के लिए आ

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