Ulfat Shayari उल्फत शायरी हिंदी में (2022-23)

Ulfat Shayari In Hindi | उल्फत शायरी हिंदी में

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Ulfat Shayari
ऐ दिल ए जार मजा देख लिया उल्फत का
हम न कहते थे कि इस काम में जिल्लत होगी

किसी महबूब ए गंदुम गूँ की उल्फत में गुजरते हैं
दम अपना जिस्म से या खुल्द से आदम निकलता है

भलाई ये कि आजादी से उल्फत तुम भी रखते हो
बुराई ये कि आजादी से उल्फत हम भी रखते हैं

उल्फत की थीं दलील तिरी बद गुमानियाँ
अब बद गुमान मैं हूँ कि तू बद गुमाँ नहीं

शबाब कर दिया मेरा तबाह उल्फत ने
खिजाँ के हाथ की बोई हुई बहार हूँ मैं

वक्त की कब्र में उल्फत का भरम रखने को
अपनी ही लाश उतारी है तुम्हें क्या मालूम

उल्फत के बदले उन से मिला दर्द ए ला इलाज
इतना बढ़े है दर्द मैं जितनी दवा करूँ

कुछ इस तरह तिरी उल्फत में काट दी मैं ने
गुनाहगार हुआ और न पाक बाज रहा

उल्फत तो देखिए मिरी दीदार के सबब
दरवेश बन के यार की चौखट पे आ गया

दर्द उल्फत का न हो तो जिंदगी का क्या मजा
आह ओ जारी जिंदगी है बे करारी जिंदगी

खार उल्फत की बात जाने दो
जिंदगी किस को साजगार आई

वारस्ता कर दिया जिसे उल्फत ने बस वो शख्स
कब दाम कुफ्र ओ रिश्ता ए इस्लाम में फँसा

ये यकीं है की मेरी उल्फत का
होगा उन पर असर कभी न कभी

तुम से उल्फत के तकाजे न निबाहे जाते
वर्ना हम को भी तमन्ना थी कि चाहे जाते

उस की उल्फत में जीते जी मरना
फाएदा ये भी जिंदगी से है

निगाह ए लुत्फ को उल्फत शिआर समझे थे
जरा से खंदा ए गुल को बहार समझते थे

न काफिर से खल्वत न जाहिद से उल्फत
हम इक बज्म में थे ये सब से जुदा थे

गए सब मर्द रह गए रहजन अब उल्फत से कामिल हूँ
ऐ दिल वालो मैं इन दिल वालियों से सख्त बे दिल हूँ

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