Uljhan Shayari उलझन शायरी हिंदी में (2022-23)

Uljhan Shayari In Hindi | उलझन शायरी हिंदी में

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Uljhan Shayari उलझन शायरी हिंदी में (2022-23) In Hindi

Uljhan Shayari
नक्श तो सारे मुकम्मल हैं अब उलझन ये है
किस को आबाद करे और किसे वीरानी दे

एक उलझन रात दिन पलती रही दिल में कि हम
किस नगर की खाक थे किस दश्त में ठहरे रहे

एक मुद्दत से इसी उलझन में हूँ
उन को या खुद को किसे सज्दा करूँ

Uljhan Shayari उलझन शायरी हिंदी में (2022-23) हिंदी में

उस के जाने का यकीं तो है मगर उलझन में हूँ
फूल के हाथों से ये खुश बू जुदा कैसे हुई

Uljhan Shayari उलझन शायरी हिंदी में (2022-23) 2 line

वो मिरी रूह की उलझन का सबब जानता है
जिस्म की प्यास बुझाने पे भी राजी निकला

कुछ नहीं मालूम होता दिल की उलझन का सबब
किस को देखा था इलाही बाल सुलझाते हुए

इस उलझन को सुलझाने की कौन सी है तदबीर लिखो
इश्क अगर है जुर्म तो मुजरिम राँझा है या हीर लिखो

बने हैं काम सब उलझन से मेरे
यही अतवार हैं बचपन से मेरे

अजीब उलझन में तू ने डाला मुझे भी ऐ गर्दिश ए जमाना
सुकून मिलता नहीं कफस में न रास आता है आशियाना

खारों से ये कह दो कि गुल ए तर से न उलझें
सीखे कोई अंदाज ए शरीफाना हमारा

वक्त और हालात पर क्या तब्सिरा कीजे कि जब
एक उलझन दूसरी उलझन को सुलझाने लगे

दाम ए खुशबू में गिरफ्तार सबा है कब से
लफ्ज इजहार की उलझन में पड़ा है कब से

उस ने सुन कर बात मेरी टाल दी
उलझनों में और उलझन डाल दी

इंकार ही कर दीजिए इकरार नहीं तो
उलझन ही में मर जाएगा बीमार नहीं तो

आप दरिया की रवानी से न उलझें हरगिज
तह में उस के कोई गिर्दाब भी हो सकता है

वही जो देता है दुनिया को उलझनों से नजात
कभी कभी वही उलझन में डाल देता है

मैं ने दुनिया छोड़ दी लेकिन मिरा मुर्दा बदन
एक उलझन की तरह कातिल की नजरों में रहा

पड़ गए जुल्फों के फंदे और भी
अब तो ये उलझन है चंदे और भी

जिन खयालों के उलट फेर में उलझीं साँसें
उन में कुछ और भी साँसों का इजाफा कर लें

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