Umar Shayari उमर शायरी हिंदी में (2022-23)

Umar Shayari In Hindi | उमर शायरी हिंदी में

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Umar Shayari
मैं तुझ से साथ भी तो उम्र भर का चाहता था
सो अब तुझ से गिला भी उम्र भर का हो गया है

तल्खाबा ए हयात पिया है तमाम उम्र
अब और क्या मिलाएगा साकी शराब में

वही दिया कि थीं आजिज हवाएँ जिन से उमर
किसी के फिर न जलाए जला बुझा ऐसा

रिश्ता ए उमर दराज अपना मैं कोताह करूँ
आवे ये तार अगर तेरे ब कार ए दामन

अपना बादल तलाशने के लिए
उमर भर धूप में नहाए हम

ये मैं था या मिरे अंदर का खौफ था जिस ने
तमाम उम्र दी तन्हाई की सजा मुझ को

वक्त दो मुझ पर कठिन गुजरे हैं सारी उम्र में
इक तिरे आने से पहले इक तिरे जाने के बाद

वो एक पल की रिफाकत भी क्या रिफाकत थी
जो दे गई है मुझे उम्र भर की तन्हाई

इक उम्र सुनाएँ तो हिकायत न हो पूरी
दो रोज में हम पर जो यहाँ बीत गई है

उमीद है हमें फर्दा हो या पस ए फर्दा
जरूर होएगी सोहबत वो यार बाकी है

इसी उमीद पे जलती हैं दश्त दश्त आँखें
कभी तो आएगा उम्र ए खराब काट के वो

दाम ए गम ए हयात में उलझा गई उमीद
हम ये समझ रहे थे कि एहसान कर गई

इसी उमीद पे बरसें गुजार दीं हम ने
वो कह गया था कि मौसम पलट के आते हैं

उमीद का ये रंग है हुजूम रंज ओ यास में
कि जिस तरह कोई हसीं हो मातमी लिबास में

न कोई वा दा न कोई यकीं न कोई उमीद
मगर हमें तो तिरा इंतिजार करना था

फकत उमीद है बख्शिश की तेरी रहमत से
वगर्ना अफ्व के काबिल मिरे गुनाह नहीं

इधर तो तूल दिया है उमीद को उस ने
उधर हयात अता की है मुख्तसर मुझ को

थी नजर के सामने कुछ तो तलाफी की उमीद
खेत सूखा था मगर दरिया में तुग्यानी तो थी

बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं
लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं

बदन का बोझ उठाना भी अब मुहाल हुआ
जो खुद से हार के बैठे तो फिर ये हाल हुआ

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