Yaari Shayari | 86+ यारी शायरी

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दोस्ती तो जिंदगी का एक खूबसूरत लम्हा है,
जिसका अंदाज सब रिश्ते से अलबेला है,
जिसे मिल जाए वह तन्हाई मे भी खुशी है,
और जिसे ना मिले तो वो भीड मे भी अकेला है..!!

 

वक़्त की यारी तो हर कोई करता है मेरे दोस्त,
मजा तो तब आये जब वक़्त बदल जाये और यार ना बदले..!!

 

कौन कहता है की यारी बर्बाद करती है,
अरे ओ यारो कोई निभाने वाला हो तो दुनिया याद करती है..!!

 

यारों की यारी भी खिचड़ी से कम नहीं,
स्वाद भले ही न रहे पर कमबख्त भूख मिटा देती है..!!

 

हम दोस्ती करते हैं तो अफसाने लिखे जाते हैं,
और दुश्मनी करते हैं तो तारिखे लिखी जाती हैं..!!

 

हमारी यारी गणित के Zero जैसी है,
जिसके साथ रहते हैं उसकी कीमत बढा देते हे..!!

उसकी याद ने आज फिर रुला दिया,
कैसा है वो चेहरा जिसने ये सिला दिया,
ग़मों में रहने का जिसे तरीका ना था,
उसकी याद ने ढेरों ग़मों के साथ जीना सिखा दिया।

फिर पलट रही हैं सर्दियों की सुहानी रातें,
फिर तेरी याद में जलने के जमाने आ गए।

न चाहकर भी मेरे होठो पर ये फ़िरयाद आ जाती है,
ऐ चाँद सामने न आ किसी की याद आ जाती हैं।

हर रात रो-रो के उसे भुलाने लगे,
आंसुओं में उस के प्यार को बहाने लगे,
ये दिल भी कितना अजीब है कि,
रोये हम तो वो और भी याद आने लगे।

उसकी याद आई है साँसों जरा अहिस्ता चलो,
धड़कनों से भी इबादत में खलल पड़ता है।

वो वक़्त वो लम्हे कुछ अजीब होंगे,
दुनिया में हम खुश नसीब होंगे,
दूर से जब इतना याद करते है आपको,
क्या होगा जब आप हमारे करीब होंगे?

कश्तियां रह जाती हैं तूफान चले जाते हैं,
याद रह जाती है इंसान चले जाते हैं,
प्यार कम नहीं होता किसी के दूर जाने से,
बस दर्द होता है उनकी याद आने से।

कुछ दर्द कुछ नमी कुछ बातें जुदाई की,
गुजर गया ख्यालों से, तेरी याद का मौसम।

बन कर अजनबी मिले थे ज़िंदगी के सफ़र में,
इन यादों के लम्हों को मिटायेंगे नहीं,
अगर याद रखना फितरत है आपकी,
तो वादा है हम भी आपको भुलायेंगे नहीं।

जुदा होकर भी सताने से बाज़ नहीं आते,
दूर रहकर भी वो दिल जलाने से बाज़ नहीं आते,
हम तो भूलना चाहते हैं हर एक याद उनकी,
मगर वो ख्वाबों में आने से भी बाज़ नहीं आते।

 

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दो लफ्ज़ क्या लिखे तेरी याद में हमने,
लोग कहने लगे तू आशिक बहुत पुराना है।

आज यह कैसी उदासी छाई है,
तन्हाई के बादल से भीगी जुदाई है,
टूट के रोया है फिर मेरा दिल,
जाने आज किसकी याद आई है।

फिर तेरी याद, फिर तेरी तलब, फिर तेरी बातें,
ऐसे लगता है ऐ दिल मेरे तुझे सकून नहीं आता।

हम तस्लीम करते हैं हमें फुर्सत नहीं मिलती,
मगर जब याद करते हैं ज़माना भूल जाते हैं।

याद कर के भूलना ही न आया हमें,
किसी के दिल को सताना ही ना आया हमें,
किसी के लिए तड़पना तो सीख लिया,
अपने लिए किसी को तड़पाना न आया हमें।

फिर उसकी याद, फिर उसकी आस, फिर उसकी बातें,
ऐ दिल लगता है तुझे तड़पने का बहुत शौक है।

हमें फुर्सत में याद करते हो तो मत करो,
मैं तन्हा हो सकता हूँ मगर फिजूल नहीं।

कोई चला गया दूर हमसे तो क्या करें,
कोई मिटा गया सब निशान तो क्या करें,
याद आती है उनकी हमें हद से ज्यादा,
मगर वो याद ना करें तो क्या करें?

कभी याद आती है कभी उनके ख्वाब आते हैं,
मुझे सताने के सलीके तो उन्हें बेहिसाब आते हैं।

चाँद के बिना अँधेरी रात रह जाती है,
साथ एक हसीन सी मुलाकात रह जाती है,
सच है कि जिंदगी कभी रूकती नहीं,
वक़्त निकल जाता है और याद रह जाती है।

बदली सावन की कोई जब भी बरसती होगी,
दिल ही दिल में वह मुझे याद तो करती होगी,
ठीक से सो न सकी होगी कभी ख्यालों से मेरे,
करवटें रात भर बिस्तर पे बदलती होगी।

साँसों का टूट जाना तो बहुत छोटी सी बात है दोस्तो,
जब अपने याद करना छोड़ दे, मौत तो उसे कहते है।

जो तूने दिया उसे हम याद करेंगे,
हर पल तेरे मिलने की फ़रियाद करेंगे,
चले आना जब कभी ख्याल आये मेरा,
हम रोज़ खुदा से पहले तुझे याद करेंगे।

नींद आँखों में नहीं वो ख्वाब खो गए,
तन्हा ही थे, कुछ तेरे बिन हम हो गए,
दिल कुछ तड़प उठा, ज़ुबान भी लड़खड़ाई,
तेरी याद में दो आँसू चुपके से बह गए।

ढूंढ रहा हूँ लेकिन नाकाम हूँ अब तक,
वो लम्हा जिसमें तू मुझे याद न आता हो।

जिससे चाहा था बिखरने से बचा ले मुझको,
कर गया तेज हवाओं के हवाले मुझ को,
मैं वो बुत हूँ कि तेरी याद मुझे पूजती है,
फिर भी डर है ये कहीं तोड़ न डाले मुझको।

मंजर भी बेनूर थे और फिजायें भी बेरंग थी,
तुम्हारी याद आई और मौसम सुहाना हो गया।

जिसको तुम भूल गए याद करे कौन उसे,
जिसे तुम याद हो वो याद किसको करे।

कुछ नहीं बाकी बचा है तेरे जाने के बाद,
तड़प उठता है मेरा दिल आ जाये जो तेरी याद,
मायूस हो गया हूँ मैं अपनी सूनी ज़िंदगी से,
कोई तो हो जो समझे मेरे दिल के यह जज़्बात।

साँस लेने से भी तेरी याद आती है,
हर साँस में तेरी खुशबू बस जाती है,
कैसे कहूँ कि साँस से मैं ज़िंदा हूँ,
जब कि साँस से पहले तेरी याद आती है।

यकीन करो मेरा, लाख कोशिशें कर चुका हूँ मैं,
ना सीने की धड़कन रुकती है, ना तुम्हारी याद।

वो सिलसिले वो शौक वो ग़ुरबत न रही,
फिर यूँ हुआ के दर्द में शिद्दत न रही,
अपनी जिंदगी में हो गए मसरूफ वो इतना,
कि हम को याद करने की फुर्सत न रही।

याद रखते हैं हम आज भी उन्हें पहले की तरह,
कौन कहता है फासले मोहब्बत की याद मिटा देते हैं।

जब रात को आपकी याद आती है,
सितारों में आपकी तस्वीर नज़र आती है,
खोजती है निगाहें उस चेहरे को,
याद में जिसकी सुबह हो जाती है।

हम भूल जाये ऐसी दिल की हसरत कहाँ,
वो याद करे हमे इतनी उसे फुर्सत कहाँ,
जिनके चारो तरफ हो अपनों का साथ,
ऐसे सनम को हमारी जरुरत ही कहाँ।

प्यार की दास्तां जब भी वक्त दोहरायेगा,
हमें भी एक शख्स बहुत याद आयेगा,
जब उसके साथ बिताये लम्हें याद आयेंगे,
आँखें नम हो जाएँगी दिल आंसू बहायेगा।

ये अच्छा उसने मेरे कतल का तरीका ईजाद किया,
मर जाता मैं हिचकियो से, इतना मुझे याद किया।

कुछ और नहीं कहना, बस इतनी ही चाहत है,
तुम मुझे उतनी ही मिल जाओ, जितनी याद आती हो।

फूलो की तरह हंसती रहो,
कलियोँ की तरह मुस्कुराती रहो,
खुदा से सिर्फ इतना मांगता हूँ,
कि तुम मुझे हमेशा याद आती रहो।

नया कुछ भी नहीं हमदम वही आलम पुराना है,
तुम्हें भुलाने की कोशिश है तुम्हीं को याद आना है।

ज़िक्र उनका ही आता है मेरे फ़साने में,
जिनको जान से ज्यदा चाहते थे हम किसी ज़माने में।
तन्हाई में उनकी ही याद का सहारा मिला,
जिनको नाकाम रहे हम भुलानें में।

अभी तक दिल में रोशन हैं तुम्हारी याद के जुगनू,
अभी इस राख में चिंगारियां आराम करती हैं।

ज़माने के सवालों को मैं हंस के टाल दू फ़राज़,
लेकिन नमी आंखों की कहती है मुझे तुम याद आते हो।

तुम्हारी याद के सहारे जिए जाते है,
वरना हम तो कब के मर गए होते,
जो जख्म दिल में नासूर बन गए,
जख्म वो कब के भर गए होते।

एक उम्मीद का दिया जल रहा था,
जिसे अश्कों की बारिश ने बुझा दिया,
तनहा अकेले ख़ुशी से जी रहा था,
आज फिर आपकी याद ने रुला दिया।

हर एक पहलू तेरा मेरे दिल में आबाद हो जाये,
तुझे मैं इस क़दर देखूं मुझे तू याद हो जाये।

किसने कह दिया आपकी याद नहीं आती,
बिना याद किये कोई रात नहीं जाती,
वक्त बदल जाता है, आदत नहीं जाती,
आप खास हो ये बात कही नहीं जाती।

कहेगा झूठ वो हमसे तुम्हारी याद आती है,
कोई है मुन्तजिर कितना ये लहजे बोल देते हैं।

बड़ी गुस्ताख है तुम्हारी याद, इसे तमीज सिखा दो,
दस्तक भी नहीं देती और दिल में उतर जाती है।