Zakham Shayari ज़ख्म शायरी हिंदी में (2022-23)

Zakham Shayari In Hindi | ज़खम शायरी हिंदी में

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Zakham Shayari
बहुत जखीम किताबों से चुन के लाया हूँ
इन्हें पढ़ो वरक ए इंतिखाब हैं मिरे दोस्त

जख्म ए निगाह जख्म ए हुनर जख्म ए दिल के बा द
इक और जख्म तुझ से बिछड़ कर मिला मुझे

नक्श जब जख्म बना जख्म भी नासूर हुआ
जा के तब कोई मसीहाई पे मजबूर हुआ

मैं जख्म जख्म नहीं हूँ मगर मसीहाई
मिरे बदन में मिरी जान क्यूँ नहीं रखती

कितने ही जख्म हैं मिरे इक जख्म में छुपे
कितने ही तीर आने लगे इक निशान पर

सदा किसे दें नईमी किसे दिखाएँ जख्म
अब इतनी रात गए कौन जागता होगा

बदन में जख्म नहीं बद्धियाँ हैं फूलों की
हम अपने दिल में इसी को बहार जानते हैं

जख्म जो तू ने दिए तुझ को दिखा तो दूँ मगर
पास तेरे भी नसीहत के सिवा है और क्या

दिखाना पड़ेगा मुझे जख्म ए दिल
अगर तीर उस का खता हो गया

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