ज़ालिम शायरी | Zalim Shayari

Zalim Shayari | ज़ालिम शायरी

Zalim Shayari In Hindi | ज़ालिम शायरी हिंदी में

* Shayari In Hindi (* हिंदी में) सम्बंधित हर शायरी पोस्ट के अन्दर है.Zalim Shayari In Hindi | ज़ालिम शायरी हिंदी में * Shayari In Hindi (* हिंदी में) सम्बंधित हर शायरी पोस्ट के अन्दर है.

Zalim Shayari
ये दर्द है हमदम उसी जालिम की निशानी
दे मुझ को दवा ऐसी कि आराम न आए

जालिम खुदा के वास्ते बैठा तो रह जरा
हाथ अपने को न कर तू जुदा मेरे हाथ से

जालिम था वो और जुल्म की आदत भी बहुत थी
मजबूर थे हम उस से मोहब्बत भी बहुत थी

जुल्म सहना भी तो जालिम की हिमायत ठहरा
खामुशी भी तो हुई पुश्त पनाही की तरह

दिल का उजड़ना सहल सही बसना सहल नहीं जालिम
बस्ती बसना खेल नहीं बसते बसते बस्ती है

दूसरा कोई तमाशा न था जालिम के पास
वही तलवार थी उस की वही सर था मेरा

अम्न और तेरे अहद में जालिम
किस तरह खाक ए रहगुजर बैठे

जो लोग मौत को जालिम करार देते हैं
खुदा मिलाए उन्हें जिंदगी के मारों से

सितम तो ये है कि जालिम सुखन शनास नहीं
वो एक शख्स कि शाएर बना गया मुझ को

जालिम तू मेरी सादा दिली पर तो रहम कर
रूठा था तुझ से आप ही और आप मन गया

आह जालिम हो चुकी इक मुंतजिर की आँख बंद
अब तिरा आना न आना सब बराबर हो गया

किस जालिम ने पर पेड़ों के काट दिए
आग उगलती धूप में साया कहीं नहीं

किया मुझ इश्क ने जालिम कूँ आब आहिस्ता आहिस्ता
कि आतिश गुल कूँ करती है गुलाब आहिस्ता आहिस्ता

जालिम ने क्या निकाली रफ्तार रफ्ता रफ्ता
इस चाल पर चलेगी तलवार रफ्ता रफ्ता

तिरे रुख्सार से बे तरह लिपटी जाए है जालिम
जो कुछ कहिए तो बल खा उलझती है जुल्फ बे ढंगी

ईद का दिन है गले आज तो मिल ले जालिम
रस्म ए दुनिया भी है मौका भी है दस्तूर भी है

कासिद जो गया मेरा ले नामा तो जालिम ने
नामे के किए पुर्जे कासिद को बिठा रक्खा

Read Also:Khwaab Shayari 
Read Also:Guroor Shayari 
Read Also:Purani Shayari