Zid Shayari ज़िद शायरी हिंदी में (2022-23)

Zid Shayari In Hindi | ज़िद शायरी हिंदी में

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Zid Shayari
शब ए वस्ल जिद में बसर हो गई
नहीं होते होते सहर हो गई

दिल हर जिद मनवा लेता है
ये बच्चा शैतान बहुत है

मिस्ल ए तिफ्लाँ वहशियों से जिद है चर्ख ए पीर को
गर तलब मुँह की करें बरसाए पत्थर सैकड़ों

साकी ओ वाइज में जिद है बादा कश चक्कर में है
तौबा लब पर और लब डूबा हुआ सागर में है

दिल भी बच्चे की तरह जिद पे अड़ा था अपना
जो जहाँ था ही नहीं उस को वहीं ढूँढना था

खुदा देवे अगर कुदरत मुझे तो जिद है जाहिद की
जहाँ तक मस्जिदें हैं मैं बनाऊँ तोड़ बुत खाना

मुमकिन नहीं चमन में दोनों की जिद हो पूरी
या बिजलियाँ रहेंगी या आशियाँ रहेगा

इधर फलक को है जिद बिजलियाँ गिराने की
उधर हमें भी है धुन आशियाँ बनाने की

जिद हर इक बात पर नहीं अच्छी
दोस्त की दोस्त मान लेते हैं

माना कि जिंदगी में है जिद का भी एक मकाम
तुम आदमी हो बात तो सुन लो खुदा नहीं

दिल भी इक जिद पे अड़ा है किसी बच्चे की तरह
या तो सब कुछ ही इसे चाहिए या कुछ भी नहीं

जिद में दुनिया की बहर हाल मिला करते थे
वर्ना हम दोनों में ऐसी कोई उल्फत भी न थी

ऐसी जिद का क्या ठिकाना अपना मजहब छोड़ कर
मैं हुआ काफिर तो वो काफिर मुसलमाँ हो गया

देखे कहीं रस्ते में खड़ा मुझ को तो जिद से
आता हो इधर को तो उधर ही को पलट जाए

क्या जिद है मिरे साथ खुदा जाने वगरना
काफी है तसल्ली को मिरी एक नजर भी

फनकार ब जिद है कि लगाएगा नुमाइश
मैं हूँ कि हर इक जख्म छुपाने में लगा हूँ

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